मुख्य सचिव

मुख्य सचिव (Chief Secretariat)

मुख्य सचिव  (Chief Secretariat)

राज्य सचिवालय के पद सोपान के शीर्ष ‘मुख्य सचिव’ होता है जो साधारणतः सामान्य प्रशासनिक विभागों का प्रमुख होता है। यह सचिवालय का एक ऐसा ‘किंगपिन’ है जो सभी स्तरों पर सचिवालय के सभी विभागों को परस्पर संयुक्त करता है। वह सचिवों का मुखिया तथा राजकीय लोक सेवाओं का अध्यक्ष है। मुख्य सचिव का राजनीतिक प्रमुख मुख्यमंत्री होता है। ‘मुख्य सचिव सचिवालय का सर्वेसर्वा होता है। सचिवालय के सभी विभागों पर उसका नियन्त्रण होता है। वह राज्य को अत्यन्त आवश्यक प्रशासकीय नेतृत्व प्रदान करता है, राज्य के सम्पर्क अधिकारी का कार्य करता है तथा अपने प्रदेश की सरकार और केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों के बीच संचार सूत्र का कार्य करता है। आन्ध्र प्रदेश प्रशासनिक सुधार समिति ने मुख्य सचिव के पद के सम्बन्ध में लिखा था-“वह लोक सेवाओं एवं सरकारी अधिकारियों का वरिष्ठ नेता है तथा उनसे सम्बन्धित समस्याओं, सेवा शर्तों एवं कार्यों को देखता है।”

मुख्य सचिव राज्यों में नागरिक सेवा का प्रमुख, उनका विश्वसनीय परामर्शदाता तथा अन्तर्भावना का रक्षक होता है। उसका पद और उसके कार्य इतने महत्वपूर्ण हैं कि वह ‘टेन्योर पद्धति’ से परे हैं। व्यवहार में मुख्य सचिव या तो मुख्य सचिव के पद से ही रिटायर हो जाता अथवा उसे केन्द्र सरकार में और अधिक महत्वपूर्ण पदों पर स्थानान्तरित किया जा सकता है। “मुख्य सचिव के पद के रूप में राज्यों में एक ऐसी संस्था विद्यमान है जिसके समतुल्य केन्द्रीय शासन में ऐसा कोई पद नहीं है।” राज्य प्रशासन में उसके द्वारा जिन कार्यों का सम्पादन किया जाता है वैसे ही कार्यों को केन्द्रीय स्तर पर मन्त्रिमण्डल सचिव, गृह सचिव और वित्त सचिव जैसे पदाधिकारियों द्वारा सम्मिलित रूप से किया जाता है। राजस्थान प्रशासनिक सुधार समिति (1963) ने मुख्य सचिव के पद की महत्ता बताते हुए लिखा है- ”सरकारी यन्त्र का मुखिया तथा मन्त्रिपद के सलाहकार के रूप में मुख्य सचिव एक विशेष स्थिति का अधिकारी होता है। वह सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका राज्य प्रशासन के सन्दर्भ में अदा करता है। विभागों में होने वाले कार्यों को देखने के साथ-साथ वह विभिन्न विभागों में समन्वय कार्य सम्पन्न करता है जिससे राज्य सरकार द्वारा अपनायी गयी नीतियों के क्रियान्वयन में एकता रहती है।”

मुख्य सचिव का चयन

(Selection of the Chief Secretary)

मुख्य सचिव राज्य में आई० ए० एस० का वरिष्ठतम अधिकारी होता है। सामान्यतया उसकी नियुक्ति ‘वरिष्ठता’ के आधार पर होती है। किन्तु ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि सचिव के चयन में योग्यता और अन्य बातें भी निर्णायक होती हैं। व्यवहार में मुख्य सचिव का चयन राज्य का मुख्यमन्त्री करता है। डॉ० मीना सोगानी के अनुसार मुख्य सचिव के चयन में जिन मुख्य तथ्यों को ध्यान में रखा जाता है वे निम्नलिखित हैं- (1) वरीयता, (2) सेवा अभिलेख, कार्य निष्पादन तथा योग्यता और (3) मुख्यमन्त्री का अधिकारी में विश्वास।

राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव के कार्य

(Functions of Chief Secretary in the State Administration)

मुख्य सचिव को राज्य प्रशासन की धुरी कहा जाता है। वैसे तो मुख्य सचिव अपने राज्य के सम्पूर्ण प्रशासनिक कार्य-कलाप के सुगम संचालन एवं दक्षता के लिए जिम्मेदार है, फिर भी प्रशासनिक अध्यक्ष के रूप में उसे निम्नांकित कार्य करने पड़ते हैं। सर्वप्रथम तो वह मन्त्रिमण्डल का सचिव होता है और इस तरह वह प्रशासनिक मामलों में मन्त्रिमण्डलीय सलाहकार के रूप में कार्य करता है। द्वितीय, वह सम्पूर्ण प्रशासनिक तन्त्र का मुखिया होता है और राज्य प्रशासन के समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। तीसरा, मुख्य सचिव राज्य सरकार के कतिपय विभागों का कार्यकारी अध्यक्ष भी होता है और इस तरह वह विभागीय अध्यक्ष के कतिपय दायित्वों का निर्वाह भी करता है।

यहाँ मुख्य सचिव के कार्यों और दायित्वों का विस्तार से विवचन अपरिहार्य है-

  1. मन्त्रिमण्डल के सलाहकार के रूप में मुख्य सचिव

    मुख्य सचिव राज्य मन्त्रिमण्डल का सचिव होता है। मन्त्रिमण्डल के सचिव के रूप में वह मन्त्रिमण्डल की बैठकों का एजेण्डा तैयार करता है, बैठकों की व्यवस्था करता है तथा कार्यवाहियों का रिकार्ड देखता है। मन्त्रिमण्डल की बैठकों में जो भी मामले प्रस्तुत किये जाते हैं वह सभी मुख्य सचिव के द्वारा ही प्रेषित किये जाते हैं, चाहे वह किसी भी विभाग से सम्बन्धित हों।

मुख्य सचिव मन्त्रिमण्डल को नीति निर्माण के सम्बन्ध में आवश्यक सहायता और सलाह देता है। वह मन्त्रिमण्डल की सभी बैठकों में भाग लेता है। इन बैठकों में मुख्य सचिव से अनेक महत्वपूर्ण मामलों पर सलाह ली जाती है। कई बार वह स्वयं अपनी ओर से किसी भी मामले पर विचार प्रस्तुत कर सकता है।

मुख्यमन्त्री के सलाहकार के रूप में वह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मन्त्रिमण्डल की बैठकों के अलावा मुख्य सचिव अनौपचारिक रूप से भी मुख्यमन्त्री को समय-समय पर आवश्यक सुझाव और सलाह दे सकता है।

  1. राज्य प्रशासन में समन्वयक के रूप में मुख्य सचिव

    मुख्य सचिव राज्य प्रशासन में प्रमुख समन्वयक है। सम्पूर्ण सचिवालय प्रशासन पर मुख्य सचिव का नियन्त्रण होता है और वह सचिवालय के कार्यों को सुचारू और अधिक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। उस राज्य सरकार के किसी भी विभाग से सम्बन्धित किसी भी मामले की पत्रावली माँग सकता है और कोई सचिव उसकी इस आज्ञा की अवहेलना नहीं कर सकता। ऐसे मामलों के अध्ययन के बाद वह चाहे तो पत्रावली सम्बन्धित मन्त्री को आवश्यक आदेश के लिए लौटा सकता है या अपने सुझावों के साथ मुख्यमन्त्री को भेज सकता है। इस अधिकार के तहत ही उसे विभिन्न विभागों में गतिविधियों और कार्यों पर नियन्त्रण रखने का अवसर मिल जाता है ताकि राज्य प्रशासन में समन्वय स्थापित किया जा सके।

अधिकांश राज्यों में मुख्य सचिव योजना विभाग तथा कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग का सचिव होत है जिससे वह समन्वयक का कार्य अधिक कुशलता से कर सकता है। वह राज्य में सचिवों की बैठकों की अध्यक्षता करता है जिससे उसे विभिन्न विभागों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपसी विचार-विमर्श द्वारा उचित समन्वय और सहयोग स्थापित करने में सहायता मिलती है।

राज्य की राजधानी में अनेक बार जिला और क्षेत्रीय अधिकारियों की बैठकें होती हैं जिनकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करता है। इन बैठकों के माध्यम से वह राज्य और जिला प्रशासन के समन्वयक रूप में भी कार्य करता है। मुख्य सचिव ही एक ऐसा व्यक्ति है जो कि जिलाधीशों के कार्यों के बारे में पूर्ण जानकारी रखे।

विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करने की दिशा में राजस्थान में विभिन्न राज्य स्तरीय ‘योजना और विकास समन्वय समितियाँ’ स्थापित की गयी हैं जिनकी अध्यक्षता मुख्य सचिव ही करता है। आजकल ऐसी तेरह समितियाँ हैं। इन समितियों की बैठकों में सम्बन्धित विभागाध्यक्षों को आमन्त्रित किया जाता है तथा वित्त सचिव एवं विशेष सचिव आयोजना भी उनमें भाग लेते हैं। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य अन्तर-विभागीय मतभेदों को परस्पर सद्भावना बढ़ाना है। समितियों द्वारा लिये गये निर्णय अन्तिम सरकारी निर्णय माने जाते हैं।

मुख्य सचिव अपने राज्य तथा केन्द्र और अन्य राज्य सरकारों के बीच आवश्यक संचार माध्यम का कार्य करता है। सामान्यतः अन्तर्राज्यीय सद्भाव और मतभेदों के सभी मामलों पर मुख्य सचिव की सलाह ली जाती है।

  1. विभागाध्यक्ष के रूप में मुख्य सचिव

    राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव कई बार कतिपय विभागों का प्रभारी भी होता है। राजस्थान में सामान्य प्रशासन, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार, मन्त्रिमण्डल सचिवालय तथा योजना विभाग मुख्य सचिव के पास है। चूंकि मुख्य सचिव अत्यधिक व्यस्त रहता है, इसलिए इन सभी विभागों के दैनिक कार्यों का मुख्य उत्तरदायित्व एक उप-सचिव या विशेष सचिव का होता है, जो मुख्य सचिव के निर्देशन में कार्य करता है। इन सभी विभागों में कतिपय मामलों पर अन्तिम निर्णय मुख्य सचिव ही लेता है।

मुख्य सचिव के अन्य महत्वपूर्ण कार्य

  1. राज्यों में शान्ति व व्यवस्था बनाये रखने के लिए यह आवश्यक कार्यवाही करता है।
  2. वह लोक सेवाओं का अध्यक्ष है तथा सरकारी सेविवर्ग की नियुक्ति, स्थानान्तरण तथा पद विमुक्ति आदि की शक्तियाँ उसमें निहित हैं।
  3. वह सचिवालय भवनों व उनके कक्षों पर प्रशासनिक नियन्त्रण रखता है।
  4. वह केन्द्रीय रिकार्ड ब्रान्च, सचिवालय पुस्तकालय तथा अधिकारी संरक्षण स्टॉफ पर जो सचिवालय के सभी विभागों में कार्य करता है, पर्यवेक्षण रखता है।
  5. संकटकालीन समय में यह राज्यों के ‘नर्व सिस्टम’ की भाँति कार्य करता है।
  6. यदि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है तो वह सम्पूर्ण राज्य प्रशासन के लिए उत्तरदायी होता है। मन्त्रिमण्डल की अनुपस्थिति में सभी महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य सचिव के द्वारा ही लिये जाते हैं तथा सभी सचिवालय विभाग उसके निर्देशन में ही कार्य करते हैं।

राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव की भूमिका एवं स्थिति

(Position and Role of Chief Secretary)

मुख्य सचिव का पद राज्य के प्रशासनिक पद सोपान में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद है। ‘मुख्य सचिव’ एक ऐसा स्त्रोत है जिसके माध्यम से सरकारी आदेश उसके अधिकारियों तक पहुँचते हैं। अधिकांश जिला अधिकारियों के लिए तो वही सरकार है। राज्य प्रशासन में उसकी भूमिका स्वयं उसके नेतृत्व सम्बन्धी गुणों और कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। इस पद के लिए राजनैतिक प्रभावों का प्रयोग न केवल प्रशासनिक क्षेत्र के लिए अपितु लोक सेवाओं के सुचारू रूप से संचालन के लिए भी घातक सिद्ध हो सकता है। राज्य प्रशासन में बढ़ते हुए राजनैतिक हस्तक्षेप को देखते हुए अनेक बार यह आशंका व्यक्त की जाती है कि भविष्य में शायद ही कोई मुख्य सचिव प्रशासनिक स्तर पर नियुक्त किया जाये तथा वह स्वतन्त्रतापूर्वक निडरता से कार्य कर सके।

प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्ययन दल ने राज्य प्रशासन पर अपने प्रतिवेदन में यह सुझाव दिया है कि मुख्य सचिव के पद को अधिक शक्तिशाली बनाया जाना आवश्यक है क्योंकि मुख्य सचिव को मुख्यमन्त्री के अधीन मुख्य समन्वयक के रूप में कार्य करना होता है।

मुख्य सचिव के पद को प्रभावशाली बनाने के लिए कई सुझाव दिये जाते हैं, जैसे-राज्य के वरिष्ठतम अधिकारियों की सूची में वरिष्ठतम व्यक्ति को ही इस पद पर आसीन किया जाये, उसका कार्यकाल लम्बा हो जिससे कि वह प्रभावपूर्ण ढंग से कार्य कर सके। मुख्य सचिव पद की प्रभावपूर्णता इस बात पर भी निर्भर करती है कि राज्य के नागरिकों से वह कैसे सम्बन्ध विकसित करता है, विरोधी दल के नेताओं एवं स्वयंसेवी संगठनों से उसका कितना जीवन्त सम्पर्क है? वस्तुतः इन्हीं सम्पर्को के माध्यम से वह राज्य की समस्याओं के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त करता है।

राजस्थान जैसे राज्य में मुख्य सचिव का चयन पूर्णतः वरिष्ठता के आधार पर न होकर योग्यता एवं विश्वसनीयता के मापदण्ड के आधार पर होता रहा है, किन्तु ऐसे भी राज्य हैं (जैसे बिहार) वहाँ25-30 अधिकारियों की वरिष्ठता को समाप्त कर मुख्य सचिव नियुक्त किये गये। लोक प्रशासन के अधिकांश विद्वान इस तथ्य पर सहमत हैं कि मुख्य सचिव का पद विशेषज्ञ को सौंपना अधिक उपयुक्त नहीं होगा क्योंकि सामान्य प्रशासनिक अधिकारी अधिक प्रभावशाली ढंग से समस्याओं को उनकी समग्रता में देख सकता है।

की राज्य प्रशासन तंत्र में उसके विशद् कार्यों और दायित्वों को देखते हुए यह उचित है कि कतिपय विशिष्ट महत्वपूर्ण मामलों तक ही वह अपने को सीमित रखे और कम महत्वपूर्ण मामलों में ज्यादा दखल न दे। संक्षेप में उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य की लोक सेवा का उसे कितना विश्वास प्राप्त है तथा केन्द्र में उसका कितना प्रभाव है?

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