सरकारी कंपनी

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सरकारी कंपनी

सरकारी कंपनी

(Government Company)

व्यावसायिक क्षेत्र में संयुक्त पूँजी कम्पनी (Joint stock company) अथवा सरकारी कंपनी व्यावसायिक एवं औद्योगिक व्यवस्था के प्रभाव के प्रारूप में एक महत्वपूर्ण घटना है। संयुक्त पूँजी वाली कम्पनियाँ प्रधानतः दो प्रकार की होती हैं निजी तथा सार्वजनिक। ये कम्पनियाँ भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 (Companies Act 1956) के प्रावधानों के अन्तर्गत स्थापित की जाती हैं। कम्पनी व्यवस्था का प्रयोग लोक उद्योगों के लिये उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में फिलिपीन में किया गया था। लोक उद्योगों की स्थापना हेतु कम्पनी प्रारूप को सर्वाधिक दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों द्वारा अपनाया गया है। श्रीलंका में सरकार ने विभागीय उद्योगों की स्थापना करके कुशल प्रबन्ध की अपेक्षा की एवं अन्ततोगत्वा सरकार द्वारा स्वयं को उद्योगों की सहभागिता से हटाने के लिये संयुक्त पूँजी वाली कम्पनी को उपयुक्त समझकर अपनाया गया। पाकिस्तान द्वारा भी इस प्रारूप को अपनाकर आर्थिक विकास हेतु स्वदेशी एवं विदेशी पूँजी प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की गई है।

भारत में भी इस प्रारूप को अपनाकर अनेक लोक उद्योगों की स्थापना की गई है। प्रो० हेन्सन के अनुसार ‘सरकारी कम्पनी’ वह लोक उपक्रम है, जिसकी स्थापना सम्बन्धित राष्ट्र के सामान्य कम्पनी अधिनियम के अधीन की जाती है तथा जिसमें सरकार सभी अंशों अथवा कुछ अंशों के स्वामित्व के माध्यम से नियन्त्रण स्थापित करती है। वास्तव में लोक उद्योगों के संगठन प्रारूप में सरकारी अथवा संयुक्त पूँजी वाली कम्पनियाँ वर्तमान समय में सबसे अधिक प्रचलित स्वरूप है। सरकारी कम्पनी लोक उद्योगों के संगठन का ऐसा स्वरूप है, जो पूँजी तथा प्रबन्धकीय स्तर पर पूर्ण स्वतन्त्रता एवं लोच के साथ सरकार को पूर्ण नियन्त्रण का अवसर प्रदान करती है। विकासशील राष्ट्रों द्वारा पूँजी, तकनीकी ज्ञान एवं कुशल प्रबन्ध प्राप्ति के दृष्टिकोण से सरकारी कम्पनियों की व्यापक पैमाने पर स्थापना की गई है।

सरकारी कम्पनी का आशय

(Meaning of Government Company)

भारतीय कम्पनी अधिनियम की धारा 617 के अनुसार, “सरकारी कम्पनी से आशय एक ऐसी कम्पनी से है, जिसकी प्रदत्त पूँजी (Paid-up Capital) का कम से कम 51 प्रतिशत भाग केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अथवा राज्य सरकारों या आंशिक रूप से केन्द्रीय तथा अंशतः एक या अधिक राज्य सरकारों के पास में हो। इसमें वह कम्पनी भी सम्मिलित है, जो किसी कम्पनी की सहायक है।” इस परिभाषा से स्पष्ट है कि कम्पनी की चुकता पूँजी (Paid-up Capital) पर सरकार का अधिकार होता है, जिसके अन्तर्गत कम्पनी के अंश भारत के राष्ट्रपति के नाम से क्रय किये जाते हैं। संगठन के इस प्रारूप में सरकार के अतिरिक्त देशी व विदेशी व्यक्तियों का अंशधारियों के रूप में सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार की कम्पनी पर सरकार का प्रबन्ध एवं स्वामित्व होने के कारण ही इन्हें सरकारी कम्पनी कहा जाता है।

कम्पनी अधिनियम में सरकारी कम्पनी को अवश्य परिभाषित किया गया है लेकिन यह अधिनियम वैधानिक निगम (Statutory Corporation) की सहायक कम्पनी की क्या स्थिति होगी, इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं करता है। कम्पनी अधिनियम की धारा 619-बी में केवल इतना ही उल्लेख किया गया है, ऐसी कम्पनी को नियन्त्रक तथा महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor-General) द्वारा अंकेक्षण कार्य के लिये सहायक कम्पनी समझा जायेगा। उदाहरण के लिये एयर इण्डिया चार्टर लि० एयर इण्डिया की सहायक कम्पनी है। इसके अतिरिक्त यहाँ यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि प्रायः सभी सरकारी कम्पनियों पर सरकार का पूर्णतः स्वामित्व है। लेकिन कुछ सरकारी कम्पनियाँ ऐसी भी हैं, जैसे-मद्रास फर्टिलाइजर तथा मद्रास रिफाइनरीज जिनमें विदेशी सहभागिता है। प्रागा टूल्स तथा नेपा मिल्स जिनमें स्वदेशी निजी सहभागिता तथा नेशनल प्रोजेक्ट कन्स्ट्रक्शन कारपोरेशन लि० में एक से अधिक राज्य की स्वामित्व पूँजी में सहभागिता है।

सरकारी कम्पनी की प्रमुख विशेषताएँ

(Main Features of A Govt. Company)

  1. सरकारी कम्पनी प्रबन्ध व्यवस्था (Management of Govt. Company)-

    सरकारी कम्पनी का संचालन कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 620 में वर्णित प्रावधानों के अन्तर्गत होता है। केन्द्रीय सरकार को यह अधिकार है कि वह सरकारी कम्पनी पर (सिवाय धारा 618 तथा 619-ए के अतिरिक्त) कम्पनी अधिनियम के लागू होने वाले प्रावधानों में किसी प्रावधान से पूर्णतः या अंशतः छूट दे सकती है।

  2. सरकारी कम्पनी के कर्मचारी (Employees of Govt. Company)-

    सरकारी कम्पनी के कर्मचारी, प्रतिनियुक्तों (Deputationists) को छोड़कर लोक सेवक (Civil Servants) नहीं होते हैं। सरकारी कम्पनी की कार्मिक नीतियों का संचालन कम्पनी के पार्षद अन्तर्नियम में वर्णित प्रावधानों के अधीन होता है। उदाहरण के लिये केन्द्रीय सरकार की सरकारी कम्पनियों के पार्षद् अन्तर्नियम में यह प्रावधान है कि कम्पनी बिना पूर्व सरकारी अनुमति के 58 वर्ष की आयु के ऊपर के व्यक्ति की नियुक्ति 3500-4000 के ऊपर के वेतनमान में नहीं कर सकती है।

  3. लेखा एवं अंकेक्षण नियमों से मुक्ति (Exempted from Accounting and Audit Laws)-

    सरकारी कम्पनी विभागों में लागू होने वाले लेखा तथा अंकेक्षण नियमों से पूर्णतः मुक्त है। कम्पनी अधिनियम की धारा 619 के अनुसार सरकारी कम्पनी के अंकेक्षण की नियुक्ति नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक के सुझाव पर केन्द्र सरकार द्वारा की जायेगी।

  4. अंकेक्षण तथा वार्षिक प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण (Audit and Submission of Annual Report)-

    कम्पनी अधिनियम की धारा 619 तथा 619-ए के अनुसार सरकारी कम्पनी के अंकेक्षण तथा जवाबदेयता के सम्बन्ध में संसद के अधिकार सुरक्षित हैं। किसी सरकारी कम्पनी (जिसमें केन्द्रीय सरकार सदस्य हो) की वार्षिक सभा के 3 माह के अन्दर केन्द्रीय सरकार इस कम्पनी के कार्य-कलाप पर एक वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करवाकर उसे यथाशीघ्र संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करेगी। यदि इस कम्पनी में कोई राज्य सरकार भी सदस्य हो तो यह प्रतिवेदन उस राज्य सरकार के दोनों सदनों में भी प्रस्तुत किया जायेगा। यदि किसी कम्पनी में केन्द्रीय सरकार सदस्य न हो तथा राज्य सरकार ही सदस्य हो तो उपर्युक्त वर्णित विधि से राज्य सरकार इस कम्पनी का वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करायेगी तथा उसे राज्य के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

  5. वित्तीय व्यवस्था (Financial Management)-

    सरकारी कम्पनी अपने धनकोष सरकार से, कम्पनी पर पूर्णतः सरकारी स्वामित्व नहीं है तो निजी अंशधारियों से भी तथा अपनी वस्तुएँ एवं सेवाएँ विक्रय करके प्राप्त करती है।

  6. वैधानिक संस्था (Statutory Body)-

    सरकारी कम्पनी सामान्य अधिनियम से जनित एक वैधानिक संस्था है। इस पद पर वाद प्रस्तुत किया जा सकता है तथा यह स्वयं वाद प्रस्तुत कर सकती है। अनुबन्ध कर सकती है तथा अपने नाम से सम्पत्ति प्राप्त कर सकती है।

  7. पार्षद सीमा नियम तथा पार्षद अन्तर्नियम द्वारा शासित (Governed by Memorandum of Association and Articles or Association)-

    सरकारी कम्पनी अपने पार्षद सीमा नियम, जिसमें कम्पनी के उद्देश्यों का उल्लेख तथा पार्षद अन्तर्नियम जिसमें कम्पनी के आन्तरिक प्रबन्ध का उल्लेख होता है, द्वारा शासित होती है।

वास्तव में ‘कम्पनी’ अथवा ‘निगम’ शब्द में किसी प्रकार का वैधानिक अन्तर नहीं है। राज्य व्यापार निगम, भारतीय पर्यटन विकास निगम तथा सामान्य बीमा संयुक्त स्कन्ध कम्पनियाँ हैं। इसी प्रकार एयर इण्डिया तथा भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) सार्वजनिक निगम हैं। यद्यपि वे अपने नाम के साथ ‘निगम’ शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं। तेल तथा प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) तथा स्टील अथोरिटी ऑफ इण्डिया लि० संयुक्त स्कन्ध कम्पनियाँ हैं लेकिन अपने नाम के साथ क्रमशः ‘आयोग’ तथा ‘अथोरिटी’ शब्द का प्रयोग करती हैं। इस प्रकार किसी लोक उद्योग के नाम के आधार पर कम्पनी तथा कारपोरेशन में अन्तर करना कठिन है। वैधानिक रूप से कम्पनी को अपने नाम के अंश के रूप में ‘सीमित’ (Limited) शब्द का प्रयोग करना चाहिए लेकिन कुछ कम्पनियाँ (जैसे भारतीय पर्यटन विकास निगम) सदा ही ऐसा नहीं करती। इसी प्रकार इण्डियन नेशनल रिसर्च डवलपमेन्ट कारपोरेशन तथा डेयरी डवलपमेन्ट कारपोरेशन को कम्पनी अधिनियम की धारा 25 के अनुसार ‘लिमिटेड’ शब्द प्रयोग न करने की छूट है।

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