केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय

केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय

केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय

(Central Ministry of Welfare)

भारत सरकार के विभिन्न मन्त्रालय जो कल्याण कार्यक्रम चला रहे थे, उन सबको एक जगह मिलाकर 14 जून, 1964 को समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department) स्थापित किया गया, जिसे 25 सितम्बर, 1985 में मन्त्रालय का दर्जा दिया गया। इसे मन्त्रालय का दर्जा देते समय तीन सम्बन्धित विषयों के कार्य सौंपे गये-

  1. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, धार्मि और भाषायी अल्पसंख्यक तथा सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग का कल्याण करना,
  2. शारीरिक एवं मानसिक आयामों का कल्याण, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम विशेषतः नशा करने वाले, मादक द्रव्यों के सेवन करने वाले, कैदियों, छोटे बच्चों की सुरक्षा एवं कल्याण ।
  3. वक्फ प्रशासन से सम्बन्धित विषय । केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय (जिसका मार्च 1998 में नाम बदलकर सामाजिक एवं न्यायिक अधिकारिता मन्त्रालय कर दिया गया) का कार्य वर्तमान में छः ब्यूरो (विभागों) द्वारा किया जाता है।

कल्याण मन्त्रालय के कार्यक्रम समाज के अत्यन्त अभावग्रस्त वर्गों अर्थात् बच्चों, महिलाओं, विकलांगों, वृद्धों और सामाजिक रूप से असमंजित लोगों के लिए निर्दिष्ट हैं। इस मन्त्रालय ने पिछले वर्षों में समाज कल्याण सेवाओं को उत्तरोत्तर विकासोन्मुख बनाया है। चालू कार्यक्रमों को विस्तृत तथा सरल और कारगर बनाने के अलावा, मन्त्रालय नवीन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करता है और फिर निर्धारित नीति के अनुरूप उन्हें कार्यान्वित करता है। महिलाओं से सम्बन्धित सामाजिक कानूनों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मन्त्रालय सतत जागरुक रहा है। मन्त्रालय ने कल्याण सेवाओं के कार्यान्वयन में स्वयंसेवी क्षेत्र को भी बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और सहायता दी है।

कल्याण मन्त्रालय का संगठन

(Organization of Welfare Ministry)

केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय का सर्वेसर्वा अध्यक्ष कैबिनेट स्तर का मंत्री होता है जिसे कल्याण मंत्री कहते हैं। इसके कार्यों में सचिवीय सहायता उपलब्ध कराने तथा कल्याण मन्त्रालय के सचिवालय का नियंत्रण एवं निर्देशन करने के लिए एक कल्याण सचिव (Welfare Secretary) होता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा स्तर का अनुभवी व्यक्ति होता है। इसके पश्चात् एक वित्तीय सलाहकार होता है जो एकीकृत वित्त शाखा (Integrated Finance Branch) का अध्यक्ष होता है। कल्याण सचिव के कार्यों में सहायता के लिए मन्त्रालय में। एक अतिरिक्त सचिव तथा पाँच संयुक्त सचिव, आठ उप सचिव, दस अवर सचिव, ग्यारह निदेशक, चार उप निदेशक, आठ अनुसंधान अधिकारी, अनुभाग अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी होते हैं। संयुक्त सचिव (Joint Secretary) प्रत्येक ब्यूरो का अध्यक्ष होता है।

कल्याण मन्त्रालय के कार्य निम्नलखित छः ब्यूरो में विभाजित हैं-

  1. अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रशासन एवं समन्वय तथा योजना ब्यूरो
  2. अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग ब्यूरो
  3. सामाजिक प्रतिरक्षा एवं बाल कल्याण ब्यूरो
  4. सामाजिक विकास एवं योजना, शोध मूल्यांकन एवं देखभाल ब्यूरो
  5. विकलांग कल्याण ब्यूरो
  6. वित्त ब्यूरो

केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय के कार्य एवं भूमिका

कल्याण मन्त्रालय एक नोडल मन्त्रालय है, अतः इसके कार्यों की सूची काफी लम्बी है। इस मन्त्रालय को आवंटित विषयों के अनुसार यह मन्त्रालय समाज में निम्नलिखित कार्य करके समाज कल्याण के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है-

  1. समाज के विभिन्न वर्गों का कल्याण करना कल्याण मन्त्रालय द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, अन्य पिछड़ा वर्ग, विकलांग, महिलाओं, बच्चों, वृद्धों, मादक द्रव्य सेवनकर्ताओं आदि के कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं, परियोजनाओं का निर्माण करता है।
  2. कल्याण कार्यक्रमों की नीति एवं योजना में समन्वय करनासमाज के ऐसे वर्ग जो विकासात्मक कार्यक्रमों के तहत समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा की अपेक्षा करते हैं, उनके लिए कल्याणकारी नीतियों, योजनाओं का क्रियान्वयन करना तथा इनमें समन्वय स्थापित करना।
  3. केन्द्रीय योजनाओं का संचालन करना कल्याण मन्त्रालय केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का संचालन करता है, जैसे- महिलाओं के साक्षरता एवं उत्तर साक्षरता, प्रौढ़ों के लिए शिक्षा शिविर, कामकाजी महिलाओं के लिए आवास-गृह, राष्ट्रीय विकलांग संस्थान द्वारा क्रियान्वित विकलांग कार्यक्रम, गैर-सरकारी तथा स्वैच्छिक संगठनों को शोध सहायता, अनुदान राशि, केन्द्रीय समाज कल्याण सलाहकार मण्डल के कार्यक्रम, समन्वित बाल कल्याण सेवाएँ, विकलांगों को विशेष रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से नियुक्तियाँ, रोजगार के सामान्य कार्यालयों में विशेष अधिकारियों की नियुक्ति, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम आदि।
  4. राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को कल्याण सम्बन्धी मार्गदर्शन एवं निर्देश केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय द्वारा राष्ट्रीय लक्ष्यों, जैसे गरीबी दूर करना, असमानता कम करना, आत्म- निर्भरता को बढ़ावा देना, साक्षरता में वृद्धि करना आदि की पूर्ति एवं प्राप्ति के लिए राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को नीति निर्माण एवं क्रियान्वयन सम्बन्धी मार्गदर्शन एवं निर्देश देता है।
  5. योजना आयोग को सहयोगकल्याण मन्त्रालय केन्द्रीय योजना आयोग के साथ मिलकर अपनी योजनाओं और सहायता राशि के आवंटन के विषय में विचार-विमर्श करता है ताकि राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए सामाजिक सेवाओं के लिए धनराशि तय की जा सके। यह धनराशि देश में पंचवर्षीय एवं एकवर्षीय योजनाओं के लिए तय की जाती है पर सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की गई है। इस योजना के अन्तर्गत 3600 रुपये तक की कीमत वाले सहायक उपकरण 1200 रुपये प्रतिमास आय वाले व्यक्तियों के लिए निःशुल्क तथा 1200 से 2500 रुपये प्रतिमास आय वाले व्यक्तियों को आधी कीमत पर प्रदान किए जाते हैं।
  6. आयोगों/समितियों/अध्ययन दलों का गठन कल्याण मन्त्रालय समय-समय पर कल्याण सम्बन्धी नीतियों, कार्यक्रमों का पुनरीक्षण, उभरती हुई नई प्रवृत्तियों एवं समस्याओं का अवलोकन करने तथा समकालीन कल्याण नीतियों तथा कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन हेतु विभिन्न आयोगों, समितियों एवं कार्य दलों का गठन करता है, जैसे-राष्ट्रीय महिला आयोग, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, नशाबन्दी
  7. एवं नशाखोरी पर केन्द्रीय समिति, अन्तर्मन्त्रालय समिति, समाज कल्याण पर कार्यशील दल आदि।
  8. राज्यों के कल्याण मंत्रियों एवं सचिवों के अधिवेशन बुलानाकेन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय प्रतिवर्ष देश के विभिन्न राज्यों के समाज कल्याण मंत्रियों एवं सचिवों का वार्षिक अधिवेशन बुलाता है जिससे देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा आदि कार्यक्रमों तथा योजनाओं के बारे में जानकारी मिल सके। साथ ही इनके क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर विचार-विमर्श किया जा कर, हल किया जावे।
  9. स्वयंसेवी संगठनों को आर्थिक सहायता कल्याण मन्त्रालय द्वारा देश में ऐसे स्वयंसेवी संगठनों, ऐच्छिक संस्थाओं तथा गैर-सरकारी संगठनों को समय-समय पर आर्थिक सहायता एवं अनुदान प्रदान किया जाता है, जो समाज कल्याण सेवाओं में कार्यरत हैं।
  10. सूचना एवं दूरस्थ शिक्षा कार्य कल्याण मन्त्रालय द्वारा जनता को सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों एवं संस्थाओं को कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा सम्बन्धी जानकारियाँ देने एवं उन्हें इन कार्यक्रमों के प्रति जागरुक करने हेतु मन्त्रालय में एक ‘सूचना एवं दूरस्थ शिक्षा प्रकोष्ठ’ की स्थापना की गई। इस प्रकोष्ठ द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विकलांगों, महिलाओं, बच्चों, वृद्धों, नशाखोरों, भिखारियों, बाल-अपराधियों आदि को कल्याण मन्त्रालय द्वारा क्रियान्वित किये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी जाती है। यह जानकारी रेडियो, टीवी, वीडियो फिल्म, डाक्यूमेन्ट्री फिल्म, प्रदर्शनियों, प्रिन्टेड मैटर, विज्ञापनों तथा प्रेस के माध्यम द्वारा जी जाती है तथा जनमानस में इसका प्रचार-प्रसार किया जाता है।
  11. समाज कल्याण पर शोध एवं मूल्यांकन करना कल्याण मन्त्रालय द्वारा समाज कल्याण कार्यक्रमों पर शोध एवं मूल्यांकन का कार्य भी किया जाता है जिससे समाज कल्याण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और उनमें उत्पन्न समस्याओं को दूर किया सके। इसके लिए मन्त्रालय में एक ‘शोध सलाहकार समिति’ गठित की गई है जो इन कार्यों को करती है (1) शोध एवं मूल्यांकन क्षेत्रों की पहचान एवं प्राथमिकता निर्धारित करना, (ii) शोध प्रस्तावों की जाँच करना, (iii) शोध परिणामों की उपयोगिता का अध्ययन करना। इस समिति द्वारा 1999 तक 338 शोध एवं मूल्यांकन कार्य किये जा चुके हैं तथा 294 शोध परियोजनाएँ पूर्ण की जा चुकी हैं।
  12. प्रकाशन कार्य कल्याण मन्त्रालय द्वारा प्रकाशन कार्य भी किया जाता है। इसके तहत कल्याण मन्त्रालय के ‘योजना, शोध, मूल्यांकन एवं मॉनिटरिंग प्रकोष्ठ (PREM CELL) तथा जनता तथा अन्य सरकारी विभागों, मन्त्रालयों तथा गैर-सरकारी संगठनों को समाज कल्याण सम्बन्धी कार्यक्रमों एवं योजनाओं से सम्बन्धित आँकड़े एवं सूचनाएँ उपलब्ध कराने के लिए निम्नलिखित प्रकाशन किये जाते हैं- (i) भारत में सामाजिक कार्य साहित्य, (ii) ऐच्छिक संगठनों को अनुदान एवं सहायता की सूची, (iii) कल्याण कार्यक्रमों की वार्षिक रिपोर्ट, (iv) वार्षिक क्रिया प्लान, (v) वार्षिक रिपोर्ट सारांश आदि। 1987 में मन्त्रालय ने एक पुस्तक Encyclopaedia of Welfare Statistics का चार खण्डों में प्रकाशन भी किया है।
  13. द्विपक्षीय समझौतों का संचालन करना कल्याण मन्त्रालय द्वारा सहायता प्राप्त समूहों को विदेशी सामग्री एवं राहत सहायता उपलब्ध करवाने हेतु विभिन्न देशों से द्वि-पक्षीय समझौते भी किए हैं, जैसे-समन्वित बाल विकास योजना (ICDS) के लिए जर्मनी, स्वीडन, विश्व बैंक से द्वि-पक्षीय समझौता किये गये हैं। इसी तरह गरीब बच्चों को पोषण एवं खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु विश्व खाद्य संगठन (F.O.) द्वारा द्वि-पक्षीय समझौता किया गया है।
  14. अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, अधिवेशनों, वर्कशॉपों में भाग लेनाकल्याण मन्त्रालय द्वारा समाज कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर विभिन्न देशों में आयोजित सम्मेलनों, अधिवेशनों एवं वर्कशॉपों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने प्रतिनिधियों को भेजा जाता है।
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