महिला एवं बाल विकास विभाग

महिला एवं बाल विकास विभाग

महिला एवं बाल विकास विभाग

(Department of Women and Child Development)

समाज कल्याण के कार्यक्रमों का निर्माण एवं क्रियान्वयन करने का प्रमुख दायित्व केन्द्रीय कल्याण मन्त्रालय का है इसीलिए 1985 तक महिला एवं बाल विकास विभाग कल्याण मन्त्रालय के अधीन एक प्रमुख विभाग था, लेकिन सितम्बर 1985 में कार्यों के आधार पर मंत्रालयों का पुनर्गठन किया गया। अतः महिला एवं बाल विकास विभाग को कल्याण मन्त्रालय से लेकर 1985 में निर्मित मानव संसाधन विकास मन्त्रालय (Human Resources Development Ministry) को हस्तान्तरित कर दिया गया। इस प्रकार इस मन्त्रालय के अधीन महिला एवं बाल विकास विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है जिसका प्रमुख उत्तरदायित्व देश की महिलाओं और बालकों का सर्वांगीण विकास करना है।

महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्य-क्षेत्र अथवा आवंटित विषय

(Scope or Allocated Subjects of Women and Child Development Department)

इस विभाग की स्थापना के समय से ही इसको निम्नलिखित विषयों से सम्बन्धित कार्यों का आवंटन किया गया, जो कि इसके कार्यक्षेत्र को स्पष्ट करते हैं-

  1. परिवार कल्याण।
  2. महिला एवं बाल विकास तथा अन्य विभागों, मन्त्रालयों, संगठनों द्वारा सम्पादित इस विषय से सम्बन्धित गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना।
  3. विद्यालय प्रवेश-पूर्व बच्चों की देखभाल ।
  4. महिलाओं का राष्ट्रीय पोषण शिक्षण में समन्वय।
  5. विभाग को सौंपे गए चेरिटेबल (दानयुक्त) एवं धार्मिक कार्य।
  6. विभाग को सौंपे गए विषयों पर ऐच्छिक प्रयासों को बढ़ावा देना।
  7. अन्य सभी विभागों तथा अधीनस्थ कार्यालयों अथवा संगठनों, जो सूची में दिए विषयों में से किसी एक साथ भी सम्बन्धित हों।
  8. महिलाओं एवं लड़कियों के अनैतिक व्यापार को रोकने सम्बन्धी कानून, 1956 (104) का प्रशासन।
  9. दहेज निरोधक अधिनियम, 1961 (287)।
  10. केयर (Co-operative American Relief Everywhere) के कार्यों में समन्वय ।
  11. महिला एवं बाल विकास से सम्बन्धित योजना, अन्वेषण, मूल्यांकन, मॉनिटरिंग, परियोजना निर्माण, सांख्यिकी और प्रशिक्षण।
  12. संयुक्त राष्ट्र संघ से सम्बन्धित महिला एवं बच्चों के अनैतिक व्यापार से सम्बन्धित संगठन।
  13. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)|
  14. केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (CSWB)|
  15. जन-सहयोग एवं बाल विकास राष्ट्रीय संस्थान (NIPCCD)।
  16. राष्ट्रीय महिला आयोग (W.C.)।
  17. खाद्य एवं पोषाहार बोर्ड (FNB)|
  18. राष्ट्रीय महिला कोष (M.K.)।
  19. महिला समृद्धि योजना (MSY)|
  20. राष्ट्रीय पोषण नीति (NNP)|
  21. इन्दिरा महिला योजना (IMY)।

महिला एवं बाल विकास विभाग का संगठन

(Organisation of Department of Women and Child Development)

स्थापना के समय (1985) में मई 1996 तक यह विभाग राज्य मंत्री के नियंत्रण में था। वर्तमान में इस विभाग का कार्यकारी अध्यक्ष एक सचिव है जो विभाग का सम्पूर्ण नियंत्रण एवं निर्देशन करता है। इस विभाग को कार्यों की दृष्टि से इसे तीन ब्यूरो (Bureaus) में विभाजित किया गया है-

  1. पोषाहार एवं बाल विकास ब्यूरो (Bureau of Nutrition and Child Development)
  2. महिला कल्याण एवं विकास ब्यूरो (Bureau of Women Welfare and Development)
  3. महिला कार्यक्रम महिला समृद्धि योजना, इन्दिरा महिला योजना एवं राष्ट्रीय महिला कोष (Bureau of Women Programmes of Mahila Samriddhi Yojana, Indra Mahila Yojana and Rashtriya Mahila Kosh)

इन तीन ब्यूरो का अध्यक्ष संयुक्त सचिव (Joint Secretary) है जिन पर महिलाएँ ही कार्यरत हैं। इसके पश्चात् एक चौथे ब्यूरो के रूप में वित्तीय सलाहकार (महिला एवं बाल विकास) है। इसके अतिरिक्त विभाग में उप सचिव (7), अवर सचिव (8), निदेशक (2), उप निदेशक (7), सहायक निदेशक (6), प्रोजेक्ट निदेशक (1), तकनीकी सलाहकार (1), अनुभाग अधिकारी (13), लेखाधिकारी एवं डेस्क अधिकारी (10) तथा अन्य कर्मचारीगण कार्यरत हैं।

संलग्न स्वायत्त संस्थाएँ

(Attached Autonomous Institutions)

इस विभाग के नियन्त्रण में तीन निम्नलिखित महत्वपूर्ण स्वायत्तशासी संस्थाएँ भी हैं जो इसके साथ समन्वय करते हुए महिला एवं बाल विकास कार्यक्रमों एवं योजनाओं को क्रियान्वित करती हैं-

  1. जन-सहयोग एवं बाल विकास राष्ट्रीय संस्थान (National Institution of Public Co-operation and Child Development : NIPCCD)
  2. राष्ट्रीय महिला कोष (Rastriya Mahila Kosh : RMK)
  3. केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (National Social Welfare and Board : CSWB)

महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्य

(Functions of Women and Child Development Department)

यह विभाग निम्नलिखित कार्यों को सम्पन्न करता है-

  1. महिला विकास से सम्बन्धित कार्य (Work Related to Women Development)

यह विभाग देश की गरीब, असहाय, गर्भवती, कामकाजी अशिक्षित महिलाओं एवं लड़कियों के सर्वांगीण विकास के हित में निम्नलिखित कार्य करता है-

  • महिला उत्थान से सम्बन्धित राष्ट्रीय नीति बनाना।
  • महिलाओं को लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33% सीटों पर आरक्षण के लिए प्रयास करना।
  • इन्दिरा महिला योजना का क्रियान्वयन-इसके अन्तर्गत 1999 तक 200 खण्डों में इन्दिरा महिला ब्लाक समिति स्थापित की जा चुकी है तथा 7000 इन्दिरा महिला केन्द्र स्थापित किये जा चुके हैं।
  • महिला समृद्धि योजना का क्रियान्वयन-यह योजना 1993 से प्रारम्भ की गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को समृद्ध बनाना है। 1999 तक इसके अन्तर्गत84 लाख ग्रामीण महिलाओं के खाते खोले जा चुके हैं जिसमें 260 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।
  • राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा-इसके अन्तर्गत विभाग के सहयोग से अब तक 7000 महिलाओं को ‘महिला लोक अदालत’ द्वारा न्याय प्राप्त हो चुका है।
  • ग्रामीण महिला विकास परियोजना के क्रियान्वयन विभाग द्वारा विश्व बैंक तथा ‘कृषि विकास के अन्तर्राष्ट्रीय कोष’ (IFAD) से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के सामाजिक- आर्थिक विकास हेतु ग्रामीण महिला विकास परियोजना प्रारम्भ की गई। इस परियोजना का उद्देश्य सामाजिक पर्यावरण विकसित करके ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को उच्च बनाना है।
  • महिला रोजगार एवं संरचनात्मक व्यवस्थापन- इसके अन्तर्गत विभाग द्वारा महिलाओं को रोजगार और उनका व्यवस्थापन करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से एक परियोजना- ‘नेशनल नेटवर्क स्ट्रक्चरल एडजेस्टमैन्ट, वूमन एम्पलॉयमैट एण्ड इक्विलिटी’ का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
  • प्रशिक्षण एवं रोजगार सहयोग कार्यक्रम का क्रियान्वयन- इसके अन्तर्गत विभाग द्वारा 1987 से ग्रामीण क्षेत्रों में परम्परागत क्षेत्रों के कृषि, हैण्डलूम, हैण्डीक्राफ्ट, मछली पालन, डेयरी तथा एग्रीकल्चर में प्रशिक्षण देना तथा रोजगार के अवसर बढ़ाना है। 1999 तक5 लाख महिलाएँ इस कार्यक्रम में लाभान्वित हो चुकी हैं।
  • प्रशिक्षण, रोजगार, उत्पादन केन्द्रों का संचालन विभाग द्वारा NORAD के सहयोग से 1999 तक 65,000 महिलाओं एवं लड़कियों को अपरम्परागत कार्य करने का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर बढ़ाए गए हैं। इस कार्यक्रम में महिलाओं एवं लड़कियों को कम्प्यूटर, इलैक्ट्रिक, घड़ी रिपयेरिंग, गारमेण्ट्स, लेदर बैग्स, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी पार्लर, होटल मैनेजमैण्ट का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • कामकाजी महिला होस्टल का संचालन करना-विभाग द्वारा 1999 तक देश में 787 कामकाजी महिला होस्टल चलाए जा रहे हैं जिनमें उन्हें सस्ती आवास सुविधा प्राप्त हो रही है।
  • भारत में महिलाओं से सम्बन्धित सांख्यिकी आँकड़ों का एक बुकलेट तैयार किया जाता है।
  1. बाल विकास सम्बन्धी कार्य (Work Related to Child Development)

विभाग द्वारा देश में गरीब, अपराधी, रोगी, कुपोषित, विकलांग आदि प्रकार के बच्चों के विकास के लिए निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं-

  • समन्वित बाल विकास सेवाओं (ICDS) का संचालन एवं क्रियान्वयन करनाविभाग द्वारा बच्चों में विकास एवं पोषण हेतु विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय खाद्य संगठन के सहयोग से देश के विभिन्न भागों में योजनाएँ एवं कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 1999 तक देश में समन्वित बाल विकास योजनाएँ 5320 विकास खण्डों में चल रही हैं जिनमें से 310 मुख्य शहरी गन्दी बस्तियों में चल रही हैं। इस योजना से देश में4 मिलियन बच्चे एवं 3.9 मिलियन महिलाएँ लाभान्वित हो रही हैं।
  • बहुराज्यीय समन्वित बाल विकास सेवा का संचालन करनाविभाग द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से आन्ध्र प्रदेश में 110, उड़ीसा में 191 तथा बिहार में 210 तथा मध्य प्रदेश में 244 खण्डों में ये सेवाएँ संचालित की जा रही हैं।
  • दूरस्थ शिक्षा का संचालन करना विभाग द्वारा बच्चों में शैक्षणिक विकास हेतु तथा शिक्षित करने हेतु 25 अक्टूबर, 1996 से देश में 15 राज्यों में इसरो (ISRO) तथा इग्नू (IGNOU) के सहयोग से सेटेलाइट दूरस्थ शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके अन्तर्गत टी० वी० द्वारा बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है।
  • राष्ट्रीय बाल नीति का क्रियान्वयन करना विभाग द्वारा बालक एवं बालिकाओं के विकास से सम्बन्धित ‘राष्ट्रीय बाल नीति’ का क्रियान्वयन किया जाता है जिससे बच्चों को जीवित रहने एवं विकास करने के लिए संरक्षण प्राप्त हो सके।
  • राष्ट्रीय बाल पोषाहार योजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन करना।
  • बच्चों में विटामिन A और आयरन तत्वों की कमियों को दूर करने के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम संचालित किया जाता है।
  • विशेष पोषाहार कार्यक्रम का संचालन करना, जिसमें 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पूरक पोषक आहार प्रदान किया जा सके।
  • राष्ट्रीय बाल पुस्कार प्रदान करना।
  • बाल दिवस का आयोजन करना।
  • बाल सेविका प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करना-सन् 1961-62 से यह कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया जिसका उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों को तैयार करना है जो कि लोगों को बच्चों की आधारभूत आवश्यकता तथा समन्वित बाल विकास सेवा की आवश्यकता और उद्देश्यों को समझा सके।
  • क्रेचेज एवं डे-केयर सेन्टरों का संचालन करना विभाग द्वारा 1975 से इसका संचालन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम ऐसे माता-पिता (अस्थाई कृषि मजदूर, निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों) में 0-5 वर्ष के बच्चों की दिन भर देखभाल के लिए संचालित किया जाता है।
  • बालवाड़ी पोषाहार कार्यक्रम का संचालन करना।
  • प्रतिवर्ष बच्चों के विशेष क्षेत्रों में उपलब्धियाँ प्राप्त करने पर सात बच्चों को पुरस्कार प्रदान करना।
  • बच्चों को राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार प्रदान करना।
  1. अन्य कार्य (Other Functions)
  • गैर-सहकारी एवं ऐच्छिक संगठनों को महिला एवं बाल विकास कार्यक्रमों में क्रियान्वयन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना ।
  • विदेशों में होने वाली महिला एवं बाल विकास से सम्बन्धित गोष्ठियों, सम्मेलनों में अपने प्रतिनिधि भेजना।
  • विदेशी सहायता प्राप्त संगठनों से महिला बाल विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आर्थिक एवं अन्य सहायता प्राप्त करना।
  • राज्य के महिला एवं बाल विकास सचिवों की प्रतिवर्ष बैठक आयोजित करना।
  • महिला एवं बाल विकास से सम्बन्धित विषयों पर शोध एवं मूल्यांकन अध्ययन करने वाले शोध संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक संगठनों, ऐच्छिक संगठनों को अनुदान एवं सहायता प्रदान करना।
  • NIPCCD (National Institute of Public Co-operation and Child Development) के कार्यों का मूल्यांकन करना।
  • पंचायत में स्थित महिलाओं के लिए सामाजिक-आर्थिक वातावरण तैयार करना।
  • भारत की महिला संसाधन व्यक्तियों की डिक्शनरी तैयार करना।
  • समाचार पत्रों में विभाग के कार्यक्रमों का विज्ञापन प्रकाशित करवाना।
  • रेडियो, टी० वी०, प्रदर्शनों, प्रिन्टेड मैटर के माध्यम से विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना।
  • देश के अल्पसंख्यकों के विकास के लिए 15 सूत्री कार्यक्रम को क्रियान्वित करना।
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