भारतीय जनसंख्या सम्बन्धी महत्वपूर्ण विशेषताएँ (Features of Indian Population)

भारतीय जनसंख्या की विशेषताएँ

भारतीय जनसंख्या की प्रमुख विशेषताएँ

(Important Features of Indian Population)

भारतीय जनसंख्या सम्बन्धी प्रमुख विशेषतायें निम्नलिखित हैं।

  1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि (Rapid Increase in Population) –

    जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। आज संसार के प्रत्येक सात व्यक्तियों में एक व्यक्ति भारतीय है। संसार की कुल आय का 2% तथा विश्व क्षेत्रफल का 2.4% भारत के हिस्से में हैं, इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में अत्यधिक जनसंख्या भार है। 1991 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 84,39,30,861 थी जो कि बढ़कर 2000 में 1 अरब से अधिक हो गयी।

भारत की जनसंख्या में काफी तीव्र गति से वृद्धि हुई है। 1961-71 की अवधि में जनसंख्या 43.9 करोड़ से बढ़कर 54.79 करोड़ हो गई। इस जनसंख्या की वृद्धि का प्रतिशत 24.8 था।

1981-91 की अवधि ने जनसंख्या में 23.50% की वृद्धि हुई। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भारत की जनसंख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई। इस वृद्धि का क्रम 1921 से जारी हुआ था। 1921 से पूर्व प्राकृतिक आपदाएं (जैसे- अकाल, सूखा, बाढ़ तथा महामारी आदि) अत्यधिक रहती थीं। जिसके कारण मृत्यु दर अधिक थी। परिणामस्वरूप जनसंख्या अधिक नहीं हो पाती थी। बढ़ते हुए वैज्ञानिक युग में इन प्राकृतिक आपदाओं पर तो नियंत्रण किया गया, किन्तु जन्म-दर पर कोई नियंत्रण न होने के कारण जनसंख्या में वृद्धि होती गयी। आज इस जनसंख्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है।

  1. जन्म-दर एवं मृत्यु दर (Birth-Rate and Death-Rate) –

    जन्म-दर एवं मृत्यु – दर के तुलनात्मक अध्ययन किए जाने से यह बात स्पष्ट होती है कि मृत्यु दर में कमी हुई किन्तु जन्म दर में न के बराबर कमी हुई, जिसके कारण जनसंख्या अधिक होती गई। 1891 की प्रथम जनगणना के समय जन्म-दर एवं मृत्यु दर क्रमशः 29.2 प्रति हजार एवं 22.8 प्रति हजार थी जो लगभग समान थी। 1921 के बाद यह अन्तर बढ़ता गया। 1961-71 की अवधि में जन्म-दर एवं मृत्यु दर क्रमशः 36.9 एवं 14.9 प्रति हजार थी। इस सम्बन्ध में यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि 1941 से 1971 की अवधि में इन दरों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। जबकि इस अवधि में मृत्यु दर में काफी कमी हुई है। 1981 की जनगणना के अनुसार 1971-80 की अवधि में जन्म-दर एवं मृत्यु दर क्रमशः 33.9 एवं 12.5 प्रति हजार रही। इस अवधि में यह देखने को मिला है कि गत दस वर्षों की अवधि में जन्म-दर एवं मृत्यु दर क्रमश: 26.4 एवं 9.0 प्रति हजार का अनुमान लगाया गया था। मृत्यु दर में कमी होने में प्रमुख योगदान स्वास्थ्य केन्द्रों का रहा, जिनके कारण भारत की जनता को अनेक सुविधाएँ उपलब्ध हुई हैं।

  2. जनसंख्या का घनत्व (Density of Population) –

    जनसंख्या के घनत्व का तात्पर्य प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाली औसत आबादी से लगाया जाता है। इसे निम्न प्रकार निकाला जा सकता है –

जनसंख्या का घनत्व = कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल

किसी देश की जनसंख्या का घनत्व प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक कारणों से प्रभावित होता है। उन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होगा, जहाँ उपजाऊ भूमि, यातायात के साधनों की उपलब्धता, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा एवं उद्योग की सम्भावनाएँ हैं।

भारतीय जनसंख्या के घनत्व में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है क्योंकि जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है किन्तु भूमि में कोई वृद्धि नहीं होती है। 1981 की जनगणना के अनुसार यहाँ का घनत्व 216 था जो कि बढ़कर 1991 में 274 हो गया। 1971-81 की अवधि में 22% की वृद्धि हुई। 1921 में भारत की जनसंख्या का घनत्व मात्र 81 था। 1921-92 की अवधि (70 वर्ष) में इस घनत्व में लगभग 3.25 गुने की वृद्धि हुई है।

जनसंख्या घनत्व में क्षेत्रीय विषमताएँ पायी जाती हैं। वर्ष 2001 में यह घनत्व निम्न प्रकार रहा है – जम्मू कश्मीर 99, हिमाचल प्रदेश 109, पंजाब 482, चंडीगढ़, 7903, उत्तर प्रदेश 689, मध्य प्रदेश 196 तथा अरुणांचल प्रदेश 13 (व्यक्ति / वर्ग किमी) ।

  1. ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या का अनुपात (Rural and Urban Population Ratio) –

    भारत एक कृषि प्रधान देश है। अतः यहाँ की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। लेकिन जनसंख्या का उत्तरोत्तर वृद्धि क्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कम तथा नगरीय क्षेत्रों में अधिक है। वर्ष 1901 में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 89.0 था जो कि घटकर 1991 में 74.3 रह गया। इसके विपरीत इसी अवधि में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत में वृद्धि हुई जो कि 10.8 से बढ़कर 25.7 हो गया। जो राष्ट्र औद्योगिक दृष्टि से विकसित हैं वहाँ नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत काफी अधिक है। जैसे- यह प्रतिशत जापान में 68, कनाडा में 64, अमरीका में 70 तथा इंग्लैंड में 79 है।

  2. स्त्री-पुरुष अनुपात (Sex Ratio) –

    भारत में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या कम रही है। 1891 की जनगणना के अनुसार पुरुष स्त्री अनुपात 1000 : 934 था जो कि 1991 की जनगणना में घटकर 1000 : 929 रह गया। इस अनुपात में अधिकांश गिरावट ही हुई है। 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 1901, 1921, 1961, 1981 तथा 1991 में क्रमश: 972, 955, 941, 934 तथा 929 रही है। वर्ष 2001 में 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 933 रही। ऐसा पहली बार ही हुआ है कि स्त्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है। 2001 की जनगणना के अनुसार कुछ अनुपात इस प्रकार थे प्रत्येक 1000 पुरुषों पर जम्मू कश्मीर में स्त्रियों की संख्या 900, बिहार में 921, राजस्थान में 922, त्रिपुरा में 950, मेघालय में 975, छत्तीसगढ़ में 990, पांडिचेरी में 1001, केरल में 1058 तथा उत्तर प्रदेश में 898 था। भारत में पांडिचेरी व केरल ऐसा राज्य है जहाँ पर पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या अधिक है। स्त्रियों की संख्या कम होने का प्रमुख कारण उनकी प्रसवकाल में मृत्यु व उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान न देना आदि है।

  3. साक्षरता अनुपात (Literacy Ratio) –

    साक्षरता की दृष्टि से स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की स्थिति अच्छी है। 1891 में यहाँ पर 37:41% व्यक्ति सांक्षर थे जिसमें पुरुषों का प्रतिशत 64.13 तथा स्त्रियों का प्रतिशत 39.39 था। ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा नगरीय क्षेत्रों में साक्षरता का अनुपात बेहतर था। इन क्षेत्रों में भी पुरुषों की साक्षरता का प्रतिशत स्त्रियों के साक्षरता प्रतिशत से बेहतर था। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की साक्षरता का प्रतिशत 40.8 तथा स्त्रियों की साक्षरता का प्रतिशत 18% था। 1991 की जनगणना के अनुसार केरल का साक्षरता अनुपात सर्वाधिक था। केरल में 90.8% व्यक्ति साक्षर थे।

  4. आयु तथा विवाह (Age and Marriage) –

    भारतीय जनसंख्या की आयु संरचना का अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि यहाँ पर बच्चों की संख्या सबसे अधिक तथा 60 वर्ष से अधिक वृद्धों की संख्या सबसे कम है। वर्ष 2000 में 0.14 आयु वर्ग में 31.61 प्रतिशत, 15-59 आयु वर्ग में 60.80 प्रतिशत तथा 60 वर्ष से ऊपर वाले आयु के वृद्धों का प्रतिशत मात्र 7.59 था। 1971 की जनगणना के अनुसार 14 से कम आयु वाले बच्चों का प्रतिशत 42 था। अन्य आयु वर्गों की स्थिति निम्न प्रकार थी-

bhartiye jansankhya ki visheshtayein

उपरोक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि सर्वाधिक प्रतिशत 30 से 59 वर्ष की आयु के वर्गों का था सबसे कम प्रतिशत 60 वर्ष से अधिक वाले वृद्धों का था।

भारत में विवाह प्रथा का प्रचलन है। 1991 में पुरुषों एवं स्त्रियों के विवाह का औसत आयु 23.3 वर्ष एवं 18.3 वर्ष थी।

  1. जीवन प्रत्याशिता (Life Expectancy)-

    जनसंख्या आंकड़ों से एक बात यह स्पष्ट हो जाती है कि व्यक्तियों की प्रत्याशित आयु में वृद्धि हो रही है। 1981 की जनगणना के अनुसार पुरुषों और महिलाओं की प्रत्याशित आयु क्रमशः 55 वर्ष एवं 53 वर्ष थी। जो कि बढ़कर 1999-2000 की अवधि में 64 वर्ष अनुमानित हुई है। इसमें स्त्रियों का जीवन काल 61.2 वर्ष, पुरुषों के 60.4 वर्ष से अधिक है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि प्रत्याशित जीवन आयु में वृद्धि हो रही है जो कि अच्छे भोजन व अच्छे वातावरण का परिणाम है।

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