संस्थापित अर्थशास्त्र की प्रमुख विशेषतायें

संस्थापित अर्थशास्त्र की विशेषताएँ

संस्थापित अर्थशास्त्र

संस्थापित अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र अथवा राजनैतिक अर्थशास्त्र का आरम्भ से ही एक महत्वपूर्ण तथा आवश्यक अंग रहा है। संस्थापित अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र के उस भाग अथवा अंग को कहते हैं जिसका निर्माण तथा विकास संस्थापक सम्प्रदाय के अर्थशास्त्रियों के हाथों हुआ था। संस्थापित अर्थशास्त्र संस्थापक सम्प्रदाय के अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित आर्थिक सिद्धान्तों तथा नीतियों का सम्पूर्ण विवेचन है। अर्थशास्त्रियों का संस्थापक सम्प्रदाय एडम स्मिथ, रिकार्डो, माल्थस, सीनियर, जे. एस. मिल तथा जे.बी. से आदि का है। यद्यपि संस्थापित अर्थशास्त्र के अर्थशास्त्रियों के सभी विचारों में सदा समानता नहीं पायी जाती है परन्तु सामान्य रूप से इस सम्प्रदाय के लगभग सभी लेखकों ने सम्प्रदाय के संस्थापक स्मिथ को अपना नेता स्वीकार किया है।

संस्थापित अर्थशास्त्र की विशेषताएँ

यह निम्नलिखित हैं-

  1. अबन्ध नीति (Laissez Faire) –

    संस्थापित अर्थशास्त्र में अबन्ध नीति का विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण स्थान है। मुख्य रूप से संस्थापित अर्थशास्त्र Laissez faire Laisser passer की नीति का विवेचन है। अबन्ध नीति एक खुली आर्थिक नीति है जिसके अन्तर्गत किसी भी प्रकार का नियन्त्रण नहीं होता है। यह स्वतन्त्र नीति उत्पादन, प्रतियोगिता, श्रम-विभाजन से सम्बन्धित होती है।

  2. संस्थापित अर्थशास्त्र की दूसरी मुख्य विशेषता जे.बी. से का प्रसिद्ध पूर्ति माँग का नियम है

    इस नियम के अनुसार पूर्ति सदा अपनी माँग उत्पन्न करती है तथा न्यूनोत्पादन तथा अत्युत्पादन की घटनाएँ विद्यमान नहीं हो सकती हैं। संस्थापित अर्थशास्त्रियों का कहना था कि यदि किसी समय किसी कारणवश माँग तथा पूर्ति के बीच समायोजन न होने के कारण कम उत्पादन या अधिक उत्पादन का संकट पैदा हो भी जाये तो यह संकट अल्पकालीन होता है तथा दीर्घकाल में समाज में कुल पूर्ति सदा कुल माँग के समान ही होती है।

  3. ब्याज की दर समाज में कुल विनियोग कुल बचत के बीच समायोजन तथा समानता स्थापित करती है

    यदि किसी समय समाज में किसी कारणवश विनियोग की मात्रा बचत की मात्रा की तुलना में अधिक हो जाती है तो ब्याज की दर में वृद्धि हो जायेगी जिसके परिणामस्वरूप विनियोग कम तथा बचत अधिक हो जायेगी तथा कुछ समय पश्चात् विनियोग तथा बचत एक-दूसरे के समान हो जायेंगे। इस प्रकार ब्याज की दर के परिवर्तन, अर्थशास्त्र संस्थापकों के विचारानुसार विनियोग तथा बचत के बीच सन्तुलन स्थापित करने के एकमात्र साधन थे। संस्थापित अर्थशास्त्र के विचारकों का पूर्ण विश्वास था कि विनियोग ब्याज दर के प्रति पूर्णतया मूल्य सापेक्ष होती है।

  4. पूर्ण प्रतियोगिता

    संस्थापित अर्थशास्त्र में पूर्ण प्रतियोगिता के विचार का एक विशेष स्थान है। संस्थापित विचारकों के विनिमय तथा वितरण सिद्धान्त पूर्ण प्रतियोगिता की मान्यता पर ही आधारित है। पूर्ण प्रतियोगिता में परिवहन व्यय शून्य होता है तथा क्रेता व विक्रेता केवल मूल्य से ही प्रभावित होते हैं। इसका अर्थ है कि अर्थशास्त्र संस्थापक अर्थशास्त्रियों के विचार से वास्तविक मनुष्य एक आर्थिक मनुष्य था जो केवल आर्थिक दृष्टिकोण से ही विवेकशील था।

  5. ह्रासमान प्रतिफल नियम को अधिक महत्व

    संस्थापित अर्थशास्त्र के विचारकों के अनुसार अर्थशास्त्र में उत्पादन तथा ह्रासमान प्रतिफल का नियम के अध्ययन पर वितरण तथा वृद्धिमान प्रतिफल के नियम की अपेक्षा बहुत अधिक महत्व दिया गया है। उनके अनुसार ह्रासमान प्रतिफल का नियम सभी आर्थिक क्रियाओं पर लागू होता है।

  6. व्यक्ति के निजी हित तथा सामाजिक हितों में समानता होती है

    संस्थापित अर्थशास्त्र के नेता एडम स्मिथ का यह पूर्ण विश्वास था कि व्यक्ति के निजी हित अथवा स्वार्थ तथा सामाजिक हितों में समानता होती है। इसका अभिप्राय यह है कि जब समाज में कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर स्वयं को किसी आर्थिक क्रिया में व्यस्त करता है, किसी वस्तु अथवा सेवा का उत्पादन करता है तो व्यक्ति की वह क्रिया उसके व्यक्तिगत हित के अतिरिक्त समस्त समाज के हितों के लिए भी उपकारी सिद्ध होती है। इसी विचार पर एडम स्मिथ का सहजवाद तथा आशावाद आधारित है। इसी विचार से एडम स्मिथ की प्रसिद्ध अबन्ध नीति का निर्माण हुआ है। एडम स्मिथ तथा अन्य संस्थापित अर्थशास्त्रियों का मत था कि समाज केवल व्यक्तियों का एक समूह है तथा इसका कोई अपना अलग अस्तित्व नहीं है।

  7. स्वतन्त्र व्यापार सिद्धान्त

    संस्थापित अर्थशास्त्र में स्वतन्त्र व्यापार सिद्धान्त का विशेष महत्व है। वास्तव में एडम स्मिथ तथा उसके बाद रिकार्डो व अन्य अर्थशास्त्रियों ने स्वतन्त्र व्यापार के पक्ष में अनेक तर्क दिये हैं। स्मिथ की विचारधारा में श्रम विभाजन का बड़ा महत्व है जो कि स्वतन्त्र व्यापार का एक मुख्य आधार है। संस्थापित अर्थशास्त्र में संरक्षण का कोई स्थान नहीं था।

  8. आर्थिक समस्याओं के अध्ययन तथा विश्लेषण में निगमन रीति का प्रयोग

    संस्थापित विचारकों ने आर्थिक समस्याओं के अध्ययन तथा विश्लेषण में निगमन रीति का प्रयोग किया है। संस्थापित अर्थशास्त्र में कुछ मौलिक मान्यताओं को सत्य मानकर इन मान्यताओं के आधार पर जीवन की समस्याओं का अध्ययन किया जाता था।

  9. आर्थिक नियमों की निरपेक्षता विश्वव्यापकता

    अर्थशास्त्र संस्थापकों दृढ़ विश्वास था कि सभी आर्थिक नियम विश्वव्यापी थे जो सभी स्थानों पर सभी समय लागू होते थे। वे आर्थिक नियमों की तुलना प्राकृतिक विज्ञानों के नियमों से करते थे।

संस्थापित अर्थशास्त्री इस बात को न समझ सके कि अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की एक शाखा है तथा सभी समाज विज्ञानों के नियम विशेष स्थितियों तथा स्थानों में लागू होते हैं।

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