जीवोम या बायोम (Biome)

जीवोम या बायोम (Biome) शब्द ग्रीक भाषा के बायोस (Bios) से बना है, जिसका अभिप्राय होता है जीवन। सम्बन्धित प्राणियों एवं पादपों के वृहद एवं प्राकृतिक सहवास जो पृथ्वी पर दूर-दूर तक बसे क्षेत्रों में पाये जाते हैं, जीवोम कहलाते हैं।

जीवोम की परिभाषा (Biome Definition)

  1. पीटर टेगेट के शब्दों में, “जीवोम पृथ्वी के वृहद पर्यावरणीय कटिबन्ध है, जो कि सुस्पष्ट पादप आवरण द्वारा चिन्हित होते हैं।”
  2. क्लीमेन्ट व रोफर्ड के अनुसार, “जीवोम एक जैव समूह होता है, जो कि भौगोलिक सीमाओं में अपने विशिष्ट’ जैव रूप तथा जातीय श्रेष्ठता से पहचाना जाता है।”
  3. ओडम के शब्दों में, “क्षेत्रीय जलवायु जब क्षेत्रीय वनस्पति एवं प्राणियों से अन्तक्रिया करती है तो विशिष्ट समुदायों का उद्भव होता है, जिन्हें सरलता से पहचाना जा सकता है, को जीवोम के नाम से पुकारते हैं।” सारांश रूप में, हम कह सकते हैं कि एक जीवोम पादपों व प्राणियों का विशिष्ट समुदाय होता है जो कि समान जलवायु दशाओं वाले क्षेत्र में विस्तृत होता है। एक जीवोम में जलवायु की समानता के कारण ही वनस्पति, प्राणी एवं उनका जीवन सामान्यतः समान होता है। प्रमुख वनस्पति समुदायों से सम्बन्धित होने के कारण ही पादप पारिस्थितिकीविदों ने इन्हें जीवोम (Biome) नाम दिया।

जीवाम के प्रकार (Types of Biome)

जीवोम की मुख्यतः दो भागों में बाँटा जा सकता है-स्थलीय तथा जलीय जीवोम। जलवायु तथा वनस्पति के आधार पर स्थलीय जीवोम को तीन भागों में बाँटा जा सकता है-वन जीवोम, घास प्रदेश जीवोम तथा मरूस्थली जीवोम। जलीय जीवोम को लवणता के आधार पर अलवण जलीय तथा समुद्री जीवोम में बाँटते हैं, किन्तु अब मुख्यतः स्थलीय पारिस्थितिकी तन्त्रों को ही जीवोम में सम्मिलित किया जाता है। दो विभिन्न जीवोम के मध्य विभाजन करने वाले संक्रमण क्षेत्र को संक्रमिका या इकोटोन (Ecotone) कहते हैं। यहाँ जीवों की जातियों की संख्या सर्वाधिक होती है।

विश्व के प्रमुख जीवोम

विश्व के स्थलीय जीवोम काफी विविधतापूर्ण हैं। इनकी प्रकृति को स्थलाकृति, जलवायु, मृदा, समुद्र तल से ऊँचाई आदि कारक प्रभावित करते हैं। सम्पूर्ण विश्व को नौ आधारभूत जीवोम या पर्यावरण कटिबन्धों में बाँटा जा सकता है-

  1. विषुवत् रेखीय वन जीवोम

  • स्थिति एवं विस्तार- विषुवत रेखा के दोनों ओर लगभग 10 अंश अक्षांशों के मध्य स्थित यह क्षेत्र पृथ्वी के स्थलीय भाग का 8 प्रतिशत भाग घेरता है। इसके अन्तर्गत मध्य अफ्रीका का कांगो बेसन, मध्य अमेरिका तथा दक्षिणी अमेरिका का अमेजन बेसिन तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया का द्वीपीय व प्रायद्वीपीय भाग सम्मिलित है।
  • जलवायु- उष्ण व आर्द्र जलवायु पायी जाती है। कुछ ऋत्विक भिन्नता को छोड़कर वर्ष पर्यन्त ऊँचे तापमान तथा वर्षा होती है।
  • वनस्पति- यह क्षेत्र पादप विविधता की दृष्टि से धनी हैं। अकेले अफ्रीका के भाग में पुष्पी पादपों की लगभग 7,000 प्रजातियाँ मिलती हैं। यहाँ मुख्यतः चौड़ी पत्ती वाले सदाबहार वन पाये जाते हैं। नदियों के बाढ़कृत मैदानों व समुद्रतटीय भागों में दलदली वन पाये जाते हैं। यहाँ त्रिस्तरीय वृक्ष पाये जाते हैं।
  • प्राणी- यहाँ वनस्पति के साथ ही प्राणियों में भी अत्यधिक विविधता पायी जाती है। प्राणी सम्पदा की दृष्टि से ये विश्व के सर्वाधिक सम्पन्न क्षेत्र हैं। प्राणियों में हाथी, चीता, शेर, हिरण, जंगली सुअर, घोड़ा, मेंढक, छिपकली, गिलहरी, साँप, बिच्छु, सेण्टीपोड्स, मगरमच्छ, घड़ियाल, विषैली मक्खियाँ आदि प्रमुख हैं।
  • मानव- प्रतिकूल जलवायु दशाओं तथा सघन वनों के कारण इस जीवोम में मानवीय गतिविधियाँ सीमित क्षेत्रों में पायी जाती हैं। जावा में बड़ी मात्रा में वनों को साफ करके कृषि की जाने लगी है। वहाँ जनसंख्या घनत्व भी ऊँचा है।
  1. मध्य अक्षांशीय परिधीय वन जीवोम

  • स्थिति एवं विस्तार- यह प्रदेश 30 अंश से 45 अंश अक्षांशों के मध्य महाद्वीपों के पूर्वी भाग में स्थित है। इसके अन्तर्गत पूर्वी चीन, जापान, यूरोप, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, आस्ट्रेलिया का दक्षिणी पूर्वी तटीय भाग आदि क्षेत्र सम्मिलित हैं। यह स्थलीय भू-भाग का लगभग 7 प्रतिशत भाग घेरता है।
  • जलवायु- शीत शीतोष्ण तथा गर्म शीतोष्ण जलवायु पायी जाती है। ग्रीष्म ऋतु में पर्याप्त गर्मी जबकि शीत ऋतु में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। वर्ष पर्यन्त मध्यम वर्षा होती है जिसका औसत 75 से 100 सेमी. है।
  • वनस्पति- यहाँ चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती तथा मिश्रित वन पाये जाते हैं जो कि पूर्वी सीमा पर धीरे-धीरे उष्ण शीतोष्ण सदाबहार वनों में मिल जाते हैं। इनमें पाइन, चेस्टनट, सहतूत, यूकोलिप्टस आदि वृक्षों के साथ ही घास भी पायी जाती है।
  • प्राण- इस जीवोम में विषुवत रेखीय प्रदेशों की तुलना में प्राणी विविधता कम है। सुअर, हिरण, तेंदुआ, साँप, सेलामेण्टर, वृक्ष, मेंढक, गिलहरी आदि यहाँ पाये जाने वाले प्रमुख जन्तु हैं।
  • मानव- इस प्रदेश में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई करके कृषि-भूमि का विस्तार किया गया है। यहाँ मध्यम से लेकर उच्च जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।
  1. शीतोष्ण कोणधारी वन या बोरियल जीवोम

  • स्थिति- इसे टैगा, साइबेरिया तुल्य या कोणधारी वन जीवोम भी कहते हैं। इसकी स्थिति मुख्यतः उत्तरी गोलार्द्ध में 45 अंश से 65 अंश अक्षांशों के मध्य है। इसके अन्तर्गत रूस, स्कण्डविनिया, कनाडा, अलास्का तथा उत्तरी पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के भाग सम्मिलित है। यह प्रदेश 14 प्रतिशत स्थलीय भाग घेरता है।
  • जलवायु- उच्च अक्षांशों में स्थिति के कारण जलवायु अत्यधिक कठोर है। ग्रीष्म ऋतु बहुत छोटी एवं ठण्डी होती है। वार्षिक तापान्तर बहुत अधिक है। वर्षा 25 से 50 सेमी. के मध्य तक ग्रीष्म ऋतु में होती है। शीतकाल में कड़ाके की ठण्ड व हिमपात होता है।
  • वनस्पति- यहाँ नुकीली पत्ती वाले तथा सदाबहार कोणधारी वन पाये जाते हैं। दक्षिणी भाग में कम वर्षा के कारण वृक्षों के स्थान पर घास अधिक मिलती है। वृक्षों में विविधता बहुत कम पायी जाती है। स्प्रूस, फर, लार्च, पाइन आदि प्रमुख वृक्ष हैं। प्राणी-बर्फीली धरातल के कारण सरीसृप बहुत कम पाये जाते हैं। मुख्यतः समूर वाले जन्तु, जैसे-खरगोश, लोमड़ी, सेबिल, गिलहरी आदि पाये जाते हैं।
  • मानव- कठोर जलवायु के कारण मानवीय गतिविधियाँ सीमित मात्रा में पायी जाती है। दक्षिण की ओर सीमावर्ती वनों को सीमित मात्रा में साफ किया गया है। यहाँ लकड़ी काटना एक प्रमुख व्यवसाय है। जनसंख्या घनत्व बहुत कम है।
  1. सवाना जीवोम

  • स्थिति- सवाना घास प्रदेश कर्क रेखा से मकर रेखा के मध्य स्थित है। ये स्थलीय-भूभाग का एक चौथाई भाग घेरे हुए हैं। उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी-पूर्वी एशिया तथा पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के भाग इसमें सम्मिलित हैं।
  • जलवायु- उष्ण जलवायु पायी जाती है जिसमें मौसमी भिन्नता बहुत कम है। वर्षा में 25 सेमी) से लेकर 200 सेंमी. तक की भिन्नता पायी जाती है। वर्षा मुख्यतः बसन्त या ग्रीष्म में होती है। वनस्पति-यहाँ खुले लम्बी घास के मैदानों से लेकर पर्णपाती मानसूनी वन पाये जाते हैं। जल धाराओं के सहारे पट्टीनुमा वन पाये जाते हैं। घासें सामान्यतः सदा हरी रहने वाली हैं।
  • प्राणी- यहाँ बहुत बड़ी संख्या में घास पर निर्भर शाकाहारी जन्तु पाये जाते हैं। इनमें जेब्रा, कंगारू, जिराफ, एण्टीलोप, हाथी आदि प्रमुख हैं। माँसाहारी जन्तुओं में शेर, चीता, भेड़िया, आदि सम्मिलित हैं।
  • मानव- प्राकृतिक घास भूमियों व पतझड़ वनों को मानव द्वारा निरन्तर साफ करके कृषि व उन्नत पशु-पालन व्यवसाय किया जा रहा है। मानसूनी एशिया के बाढ़कृत मैदानों पर घनत्व अधिक है, अन्यत्र कम है।
  1. भूमध्य सागरीय जीवोम

  • स्थिति- ये महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में 30 अंश से 45 अंश अक्षांशों के मध्य पाये जाते हैं। सर्वाधिक विस्तार भूमध्य सागर के चारों तथा दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में है।
  • जलवायु- यहाँ की जलवायु उष्ण शीतोष्ण तथा मध्यम है। ग्रीष्मकाल प्रायः शुष्क होता है। वर्षा का औसत 50 से 75 सेमी. तक पाया जाता है। शीतऋतु में मूसलाधार वर्षा होती है।
  • वनस्पति- यहाँ पाये जाने वाले वृक्षों तथा झाड़ों में शुष्क ग्रीष्मकाल में अनुकूलन के लिए मोटी छाल व गांठदार जड़ें पायी जाती हैं। वृक्ष मुख्यतः सदाबहार व कठोर लकड़ी वाले होते हैं। इनमें जैतून, ओक, चीड़, फर, अंजीर, कॉक आदि सम्मिलित हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूकैलिप्टस प्रमुख वृक्ष हैं। विभिन्न प्रकार के झाड़ भी यहाँ बड़ी, संख्या में मिलते हैं।
  • प्राणी- यहाँ हिरण, खरगोश, गुआनो, साँप आदि वन्य प्राणियों के अलावा अंगोरा बकरी, मेरिनी भेड़ व घोड़े जैसे पालतू पशु भी बड़ा संख्या में हैं।
  • मानव- यहाँ के प्राकृतिक स्वरूप में मानव ने काफी परिवर्तन किया है। भूमध्य सागर के तटवर्ती भागों में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का विस्तार किया गया है।
  1. मध्य अक्षांशीय घास भूमि जीवोम

  • स्थिति- मध्य अक्षांशों में स्थित शीतोष्ण घास के मैदान पृथ्वी के स्थलीय भू-भाग का 9 प्रतिशत भाग घेरते हैं। इसमें मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप, मध्यवर्ती उत्तरी अमेरिका तथा पूर्वी ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।
  • जलवायु- यहाँ की जलवायु में ऋतुओं के अनुसार अत्यधिक भिन्नता पायी जाती है। शीतकाल काफी ठण्डा होता है तथा ध्रुवीय हवाओं का प्रभाव रहता है। वर्षा मुख्यतः ग्रीष्म व बसन्त ऋतु में होती है। वर्षा का औसत 30 से लेकर 60 सेमी0 तक पाया जाता है।
  • वनस्पति- वनस्पति में विभिन्न प्रकार की घासों की प्रधानता है। इन घास के मैदानों को मध्य एशिया में स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज, अर्जेंटाइना में पंपाज, दक्षिणी अफ्रीका में वेल्ड्स तथा ऑस्ट्रेलिया में डाउन्स कहते हैं। प्रेयरीज की घास लम्बी जबकि स्टेपीज की छोटी है। विभिन्न भागों में घास के साथ यूकैलिप्टस, ओक, पाइन, मेपल आदि वृक्ष तथा झाड़ियाँ भी पायी जाती हैं।
  • प्राणी- इन घास भूमियों पर बिसन, एण्टीलोप, कंगारू, हिरण, खरगोश, भेड़िया, सियार, लोमड़ी आदि जन्तु बड़ी संख्या में पाये जाते हैं। मानव-आंखेट, पशुपालन तथा कृषि जैसी गतिविधियों के कारण मानव ने इस जीवोम में काफी परिवर्तन करदिया है। अब ये घास भूमियाँ प्रमुख अन्न उत्पादक क्षेत्रों में परिवर्तित हो गई हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक नहीं है।
  1. शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क बंजर क्षेत्र जीवोम

  • स्थिति- शुष्क मरूस्थली या बंजर क्षेत्र का विस्तार सभी महाद्वीपों पर पाया जाता है। इनमें से अधिकतर महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में तथा कर्क व मकर रेखा के निकट स्थित हैं। अफ्रीका में सहारा, पश्चिमी एशिया में अरब तथा ऑस्ट्रेलिया का मध्य व पश्चिमी भाग विशाल मरूस्थल हैं। यह जीवोम विश्व के स्थलीय भाग का 21 प्रतिशत भाग घेरता है। इसे उष्ण मरूस्थलीय जीवोम भी कहते हैं।
  • जलवायु- उष्ण एवं शुष्क जलवायु वाले इस प्रदेश में अत्यधिक तापान्तर पाया जाता है। विश्व के सर्वाधिक तापमान ग्रीष्मकाल में इन्हीं क्षेत्रों में पाये जाते हैं। वर्षा का औसत 25 सेमी. से कम रहता है।
  • वनस्पति- जलवायु की चरम दशाओं के कारण वनस्पति आवरण बहुत कम पाया जाता है। अधिकतर भाग पादप विहीन हैं। छितराए हुए रूप में कैक्टस, बबूल, खेजड़ी, केर, झाड़ियाँ, खजूर आदि मरूद्भिद वर्ग के पादप पाये जाते हैं। अधिकतर पादपों में पत्तियाँ बहुत कम होती हैं तथा कांटे पाये जाते हैं।
  • प्राणी- पादपों की संख्या बहुत कम होने के कारण जन्तु भी बहुत कम पाये जाते हैं। इनमें बिलों व मिट्टी में रहने वाले सरीसृप तथा छोटे जन्तु प्रमुख हैं। काला हिरण, नेवला, साँप, गिरगिट, गोह, गिलहरी, खरहा, सेई आदि यहाँ के प्रमुख जन्तु हैं। पालतू पशुओं में ऊँट व भेड़ प्रमुख हैं।
  • मानव- पर्यावरण की प्रतिकूल दशाओं के कारण मानव आवास नगण्य है। मात्र सिंचाई की सुविधा वाले सीमित भागों में मानव की गतिविधियाँ पायी जाती हैं।
  1. टुण्ड्रा जीवोम

  • स्थिति- इसके अन्तर्गत उच्च अक्षांशों में स्थित उत्तरी कनाडा, उत्तरी स्कैण्डीनेविया, साइबेरिया आदि क्षेत्र सम्मिलित हैं। ये समस्त भू-भाग पृथ्वी के स्थल का 5 प्रतिशत भाग घेरते हैं।
  • जलवायु- टुण्ड्रा प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। ग्रीष्मकाल बहुत ही छोटा एवं ठण्डा होता है। वर्षा बहुत कम मात्रा में ग्रीष्मकाल के अन्त में या पतझड़ में होती है। शीतकाल में हल्का हिमपात होता है। धरातल पर वर्ष के अधिकांश भाग में बर्फ जमी रहती है तथा बर्फीले तूफान चलते हैं।
  • वनस्पति- सूर्य का प्रकाश बहुत कम मात्रा में मिलने तथा हिमाच्छादित भू-भाग के कारण यहाँ पादप मात्र ग्रीष्मकाल में ही देखे जा सकते हैं। अधिकांश पौधे बहुत छोटे व गुच्छेनुमा होते हैं। ग्रीष्मकाल में उगने वाले पुष्पी पादपों के अलावा काई, मॉस, लाइकेन आदि यहाँ के प्रमुख पादप हैं।
  • प्राणी- यहाँ पाये जाने वाले अधिकांश प्राणी सफेद या हल्के भूरे रंग के होते हैं। रेण्डियर, ध्रुवीय भालू, ध्रुवीय लोमड़ी, कस्तूरी बैल, भेड़िया, खरहा, कैरिबो, लैमिंग पेंग्विन आदि यहाँ के प्रमुख जन्तु हैं।
  • मानव- पर्यावरण की प्रतिकूल दशाओं के कारण इन क्षेत्रों में मानव के क्रिया-कलाप नगण्य हैं। कृषि भूमि का अभाव है। मात्र घुमक्कड़ जातियाँ यहाँ निवास करती हैं।
  1. ध्रुवीय जीवोम

इसके अन्तर्गत अण्टार्कटिका व आर्कटिक क्षेत्र सम्मिलित हैं। यह भू-पृष्ठ का 11 प्रतिशत भाग घेरता है। हिमटोपियों के क्षेत्र होने के कारण यहाँ सदैव बर्फ जमी रहती है। यहाँ वर्ष पर्यन्त कड़ाके की ठण्ड रहती है। वर्ष के किसी भी माह में तापमान हिमांक बिन्दु से ऊपर नहीं जा पाता है। वनस्पति के नाम पर मात्र काई, लाइकेन व मॉस तथा प्राणियों में पेंग्विन, वालरस आदि पाये जाते हैं। मानवीय क्रिया-कलापों से ये प्रदेश अछूते हैं।

महत्वपूर्ण लिंक

Disclaimer: wandofknowledge.com केवल शिक्षा और ज्ञान के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी प्रश्न के लिए, अस्वीकरण से अनुरोध है कि कृपया हमसे संपर्क करें। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। हम नकल को प्रोत्साहन नहीं देते हैं। अगर किसी भी तरह से यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है, तो कृपया हमें wandofknowledge539@gmail.com पर मेल करें।

About the author

Wand of Knowledge Team

Leave a Comment

error: Content is protected !!