बुद्धि (Intelligence)

बुद्धि (Intelligence)

वास्तविक आयु एवं मानसिक आयु

किसी भी बालक अथवा व्यक्ति की बुद्धि का आधार उसकी मानसिक आयु एवं वास्तविक आयु क अनुपात के रूप में किया जाता है। अत: वास्तविक व मानसिक आयु के प्रत्यय को जानना आवश्यक है।

वास्तविक आयु (Chronological Age)

बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में किसी बालक अथवा व्यक्ति की वास्तविक आयु से तात्पर्य उस आयु से होता है जो उसकी बुद्धि परीक्षण देते समय होती है और चूँकि किसी व्यक्ति में बुद्धि का विकास सामान्यत: 16 वर्ष तक पूर्ण हो चुकता है इसलिए बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में 16 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों की भी वास्तविक आयु 16 वर्ष मानी जाती है।

वास्तविक आयु को वर्ष, माह और दिन में मापा जाता है । गणना की सुविधा की दृष्टि से 15 दिन से अधिक दिनों को पूरा माह मान लिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी बालक की बुद्धि परीक्षण देते समय वास्तविक आयु 6 वर्ष से 3 माह 4 दिन होती है तो उसे 6 वर्ष 3 माह ही माना जाता है और यदि वह 6 वर्ष 3 माह 16 दिन हो जाती है तो उसे फिर 6 वर्ष 4 माह माना जाता है । अन्त में माहों को भी वर्ष में बदल दिया जाता है। उदाहरणार्थ 6 वर्ष 4 माह का अर्थ होगा 6^4/12 वर्ष 6^1/3 वर्ष 19/3 वर्ष।

मानसिक आयु (Mental Age)

बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में किसी बालक अथवा व्यक्ति की मानसिक आयु से तात्पर्य उनक बौद्धिक विकास की सीमा से होता है। मनोवैज्ञानिकों ने अपने प्रयोगों द्वारा यह ज्ञात किया है कि किस आयु के सामान्य बालकों की मानसिक शक्तियाँ कितनी विकसित होती हैं और वे किस प्रकार की मानसिक क्रियाएँ करने में सफल होते हैं। यदि कोई बालक उतनी ही मानसिक क्रियाएँ सही ढंग से करता है जो उसकी वास्तविक आयु के लिए पायी गयी हैं तो इसका अर्थ होता है कि बालक की मानसिक आयु वही है जो उसकी वास्तविक आयु है और यदि वह अपनी वास्तविक आयु के लिए निश्चित क्रियाओं के साथ-साथ अपने से अधिक आयु के बालकों के लिए निश्चित क्रियाओं को भी कर लेता है तो उसकी मानसिक आयु उसकी वास्तविक आयु से अधिक होगी। इसके विपरीत यदि वह अपनी आयु के लिए निश्चित क्रियाओं को सही ढंग से नहीं कर पाता तो उसकी मानसिक आयु उसकी वास्तविक आयु से कम होगी।

बुद्धि-लब्धि की परिभाषा तथा सूत्र

किसी बालक अथवा व्यक्ति की बुद्धि का मापन सामान्यतः तो बुद्धि लब्धि के रूप में किया जाता है, परन्तु कुछ परीक्षणों में विचलन बुद्धि लब्धि के रूप में भी किया जाता है इसलिए आगे बढ़ने से पहले इनके अर्थ भी समझ लेना चाहिए।

बुद्धिलब्धि (Intelligence Quotient)

बुद्धि लब्धि से तात्पर्य बालक अथवा व्यक्ति की मानसिक आयु एवं वास्तविक आयु के अनुपात से होता है। इस अनुपात में से दशमलव बिन्दु हटाने के लिए इस अनुपात को 100 से गुणा कर दिया जाता है। इस प्रकार-

बुद्धि लब्धि = ( मानसिक आयु / वास्तविक आयु ) X 100

इसे संक्षेप में इस प्रकार लिखा जाता है-

I.Q. = ( M.A /C.A ) × 100

इस सूत्र से स्पष्ट है कि यदि किसी बालक अथवा व्यक्ति की मानसिक आयु और वास्तविक आयु समान अर्थात् एक बराबर होगी तो उसकी बुद्धि लब्धि 100 आयेगी, यदि मानसिक आयु वास्तविक आयु से अधिक होगी तो बुद्धि लब्धि 100 से अधिक आयेगी और यदि मानसिक आयु वास्तविक आयु से कम होगी तो बुद्धि लब्धि 100 से कम आयेगी और इस बुद्धि लब्धि के आधार पर उसकी बुद्धि का मूल्यांकन मनोवैज्ञानिक टरमैन (Terman) द्वारा निर्मित निम्नांकित तालिका से किया जाता है।

व्यक्तिगत और सामूहिक बुद्धि परीक्षणों में अंतर

व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण

(Individual Intelligence Test)

सामूहिक बुद्धि परीक्षण

(Group Intelligence Test)

1. इन परीक्षणों का निर्माण एवं मानकीकरण करना कठिन होता है । 1. इन परीक्षणों का निर्माण एवं मानकीकरण करना व्यक्तिगत परीक्षणों की अपेक्षा सरल होता है।
2. ये परीक्षण प्रायः मौखिक होते हैं । 2. ये परीक्षण प्रायः लिखित होते हैं।
3. इनकी समय सीमा प्रायः निश्चित नहीं होती। 3. इनकी समय सीमा प्रायः निश्चित होती है।
4. इन परीक्षणों में आयु वर्ग व्यापक होता है। 4. ये परीक्षण विशेष आयु वर्ग के लिए होते हैं।
5. ये कम आयु के बच्चों के लिए अधिक उपयोगी होते हैं। 5. ये परिपक्व आयु के बच्चों के लिए अधिक उपयोगी होते हैं।
6. इनका प्रयोग अशिक्षित एवं विकलांग बच्चों पर भी किया जा सकता है। 6. इनका प्रयोग इन श्रेणियों के बच्चों पर नहीं किया जा सकता है।
7. इन परीक्षणों का प्रशासन करना कठिन होता है, इनके प्रशासन के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति चाहिए। 7. इनका प्रशासन सरल होता है। सामान्य शिक्षक भी इनका प्रशासन कर सकते हैं।
8. इनका प्रशासन एक समय में एक ही व्यक्ति पर किया जा सकता है इसलिए किसी समूह के व्यक्तियों की बुद्धि का मापन करने में समय, शक्ति और धन अधिक लगते हैं। ये अधिक खर्चीले होते हैं। 8. इनका प्रशासन एक समय में अनेक व्यक्तियों पर किया जा सकता है इसलिए इनके द्वारा किसी समूह के व्यक्तियों की बुद्धि मापने में अपेक्षाकृत बहुत कम समय, शक्ति और धन लगता है। ये कम खर्चीले होते हैं।
9. इनके प्रशासन में परीक्षणकर्ता और प्रयोज्य के बीच सीधा सम्बन्ध होता है। 9. इनके प्रशासन में उनके बीच कोई सम्बन्ध नहीं होता।
10. इन परीक्षणों में संकोची व्यक्तियों को परेशानी होती है। 10. इन परीक्षणों में किसी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती।
11. इनके प्रशासन के समय प्रयोज्य को प्रोत्साहित किया जा सकता है। 11. इनके प्रशासन के समय ऐसा कुछ नहीं किया जा सकता।
12. इनके प्रशासन के दौरान प्रश्न व समस्याओं के क्रम व स्वरूप में आवश्यकतानुसार कुछ परिवर्तन किया जा सकता है। 12. इनके प्रशासन के दौरान ऐसा कुछ नहीं किया जा सकता।

 

13. इनका उत्तर देते समय नकल के कोई अवसर नहीं होते। 13. इनका उत्तर देने में नकल की जा सकती है।
14. इन परीक्षणों का फलांकन करना कठिन होता है। 14. इनसे प्राप्त अंकों की व्याख्या करना सरल होता है।
15. इनमें प्राप्त अंकों की गुणात्मक व्याख्या की जा सकती है। 15. इनमें प्राप्तांकों की व्याख्या मानकों के आधार पर की जा सकती है।
16. इनसे प्राप्त अंकों की व्याख्या करना कठिन होता है 16. इनसे प्राप्त अंकों की व्याख्या करना सरल होता है।
17. इन परीक्षणों में वैधता एवं विश्वसनीयता अपेक्षाकृत अधिक होती है। 17. इन परीक्षणों में वैधता एवं विश्वसनीयता अपेक्षाकृत कम होती है।
18. इन परीक्षणों में वस्तुनिष्ठता अपेक्षाकृत कम होती है। 18. इन परीक्षणों में वस्तुनिष्ठता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

 

महत्वपूर्ण लिंक

Disclaimer: wandofknowledge.com केवल शिक्षा और ज्ञान के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी प्रश्न के लिए, अस्वीकरण से अनुरोध है कि कृपया हमसे संपर्क करें। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। हम नकल को प्रोत्साहन नहीं देते हैं। अगर किसी भी तरह से यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है, तो कृपया हमें wandofknowledge539@gmail.com पर मेल करें।

About the author

Wand of Knowledge Team

Leave a Comment

error: Content is protected !!