प्रतिभाशाली बालक

प्रतिभाशाली बालक

अर्थ एवं परिभाषा 

सामान्यतः प्रतिभाशाली बालक विशिष्ट बालक होता है, जिसे अधिसामान्य बालक भी कहते हैं। यह वे बालक होते हैं, जिनकी बौद्धिक क्षमता सर्वोच्च श्रेणी की होती है। इनका बुद्धि-लब्धांक सामान्य बालकों से अधिक होता है, ये ज्ञान ग्रहण करने में श्रेष्ठ होते हैं, ये उच्च योग्यता वाले तथा परीक्षा में अधिकतम अंग लाकर सभी को चकित कर देने वाले होते हैं। इनमें कल्पना-शक्ति, तर्कशक्ति, स्मरण-शक्ति एवं सूझ-शक्ति अधिक होती है। इनका ध्यान-विस्तार अधिक होता है तथा अपने ध्यान को देर तक केन्द्रित कर सकते हैं।

प्रश्न यह है कि प्रतिभाशाली कहलाने के लिए कितनी बुद्धि होनी चाहिए? मनोवैज्ञानिक के अनुसार 140 से अधिक बुद्धिलब्धि वाले बालक प्रतिभाशाली होते हैं। कुछ बालकों की बुद्धिलब्धि 180 या 190 तक भी होती है। अतः 140 से 180 तक बुद्धिलब्धि वाले बालक प्रतिभाशाली कहे जाते हैं। ये बालक प्रत्येक जाति, धर्म, क्षेत्र और समाज में पाये जाते हैं। बालक और बालिकाएं समान रूप से प्रतिभाशाली होते हैं। किसी विद्यालय में ऐसे बालकों की संख्या 10-15 प्रतिशत से अधिक नहीं होती।

परिभाषा

प्रतिभाशाली बालकी की विभिन्न परिभाषाएँ दी गयी है, क्योंकि प्रतिभाशालीता का कारण बच्चे की बुद्धिमत्ता और क्षमताएँ होती हैं।

गिलफोर्ड ने बच्चों में 120 शैक्षिक योग्यताएं बताया है।

टरमन और हैलिगवर्थ ने 130 बुद्धि-लब्धांक वाले बच्चों को प्रतिभाशाली कहा है। इन्हीं विद्वानों ने अपने गत अध्ययन के आधार पर 140 बुद्धि लब्धांक को प्रतिभाशाली बालों की न्यूनतम बुद्धि लब्धि की सीमा बताया है।

किर्क ने प्रतिभाशाली का कारण निम्नलिखित बताया है-

  1. सामाजिक रूप प्रतिभाशाली (The Socially Talented)
  2. यांत्रिक रूप से प्रतिभाशाली (Mechanically Talented)
  3. कलात्मक प्रतिभाशाली (Artistically Talented)
  4. संगीत में प्रतिभाशाली (Musically Talented)
  5. भाषाई दृष्टि से प्रतिभाशाली (Linguistically Talented)
  6. शारीरिक रूप से प्रतिभाशाली (Physically Talented)
  7. अकादमिक रूप से प्रतिभाशाली (Academically Talented)

स्किनर एंव हैरीमैन के विचार से– “प्रतिभा शब्द का प्रयोग उन एक प्रतिशत बालकों के लिए किया जाता है, जो सर्वश्रेष्ठ बुद्धिमान होते हैं।”

क्लीगर और विश के अनुसार- “प्रतिभावान शब्द उन सभी बालकों को सम्मिलित करता है, जो शैक्षिक रूप से विद्यालय के उच्च 15 से 20 प्रतिशत उपलब्धि वर्ग में आने के लिए उच्च मानसिक योग्यता व कार्यक्षमता रखतें हो या किसी विशेष क्षेत्र, जैसे गणित, यांत्रिकी, विज्ञान, कलात्मक अभिव्यक्ति, सृजनात्मक लेखन, संगीत व सामाजिक नेतृत्व में उच्च स्तरीय प्रतिभा व अपने वातावरण से मुकाबला करने की अनोखी सृजनात्मक योग्यता रखते हों।”

टरमन और ओडेन के अनुसार- “प्रतिभाशाली बालक शारीरिक संगठन, सामाजिक, समायोजन, व्यक्ति के लक्षणों, विद्यालय में उपलब्धि, खेल की सूचनाओं और रुचियों की बहुरूपता में सामान्य बालकों से बहुत श्रेष्ठ होते हैं।”

इन उपर्युक्त परिभाषाओं का अध्ययन कर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि प्रतिभाशाली एवं विशिष्ट शब्द है, जो किसी बालक की किसी विशेष अभिक्षमता की ओर जोर देता है। वर्तमान विचारधारा के अनुसार बुद्धिलब्धि ही प्रतिभाशाली बालक का आधार नहीं, वरन् अन्य उत्कृष्ट विशेषताएँ भी इसमें सम्मिलित होती है। प्रतिभा सम्पन्न बालकों में सामान्य बालकों अधिक क्षमता पायी जाती है।

प्रतिभाशाली बालकों के लिए शैक्षिक प्रावधान (Education Provisions for Gifted Children)

प्रतिभा सम्पन्न बालक समाज और देश की धरोहर होते हैं। इन बालकों की शिक्षा-व्यवस्था उनके विशिष्ट आवश्यकताओं, रुचियों एंव उनके वास्तविक शैक्षिक स्तर के अनुरूप होनी चाहिए। प्रतिभा सम्पन्न बालक के लिए शैक्षिक प्रावधान निम्नांकित तीन स्तरों पर लागू करना चाहिए।

  • प्रशासनिक स्तर पर (Administrative Level)
  • शैक्षिक स्तर पर (Educational Level)
  • अन्य प्रावधान।
  1. प्रशासनिक स्तर पर शैक्षिक प्रावधान-

    प्रतिभा सम्पन्न बच्चों के लिए विद्यालय प्रशासन अपने स्तर से जो प्रयास कर सकता है, वह निम्न है-

  • त्वरण- (Acceleration)
  • क्षमता या योग्यता का समूहीकरण (Ability Grouping)

(i) त्वरण (Acceleration)- इसका अभिप्राय ऐसी परियोजना लागू करने से है, जिसके माध्यम से बच्चे को दी जाने वाली शैक्षिक सहायता में उसकी प्रगति उसे औसत से कम आयु में ही प्राप्त हो जाये। त्वरण व्यवसाय निम्नांकित रूपों में की जा सकती हैं-

  • शीघ्र प्रवेश
  • शीघ्र कक्षोन्नति
  • कक्षाएँ लाँघना (Grade Skipping)
  • एक समय में कई पाठ्यक्रमों का अध्ययन (Simultaneous Course)

(ii) क्षमता समूहीकरण– एक सी प्रतिभाशाली बालकों के पृथक-पृथक समूह बनाना और प्रत्येक समूह को उसकी योग्यता के अनुरूप जटिल स्तर का कार्य सौंपना। इस विधि से तैयार योग्यता समूह और पूरी प्रक्रिया, योग्यता या क्षमता समूहीकरण कही जाती है। एक समूह (Ability Groups) में उसमें 20 बच्चे तक हो सकते हैं। यह निर्भर करता है कि किस प्रतिभा के कितने बच्चे हैं? एक बालक एक साथ से अधिक योग्यता समूहों का सदस्य हो सकता है? यदि उसके अन्दर विभिन्न क्षेत्र में प्रतिभा हो।

  1. शैक्षिक स्तर पर प्रावधान (Educational Provisions)-

    प्रतिभा सम्पन्न बालकों के लिए सामान्य बालकों से हटकर कुछ कठिन या उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम होना चाहिए, जिसे पढ़ने के लिए वह प्रेरित हों। प्रायः सामान्य पाठ्यक्रम को पढ़ने में उनकी रुचि नहीं होती, क्योंकि वह उनके स्तर के अनुरूप नहीं होता। अतः पाठ्यक्रम को स्तरानुकूल और समृद्ध बनाकर उनके समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। यह समृद्धीकरण दो प्रकार के होते हैं-

  • मात्रात्मक समृद्धीकरण (Quantitative Enrichment)
  • गुणात्मक समृद्धीकरण (Qualitative Enrichment)

(a) मात्रात्मक समृद्धीकरण- इसका अभिप्राय पाठ्यक्रम में नियोजित विषयों की

संख्या और एक विषय में स्तरीय पाठों की संख्या एवं क्रियाओं की संख्या में वृद्धि कर पाठ्यक्रम को समृद्ध करने से है। पाठ्यक्रम समृद्धीकरण हेत निम्नांकित प्रयास करने चाहिए।

  • सामान्य गणित के स्थान पर उच्च गणित का समावेश।
  • सामाजिक विषय अर्थात् इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र में अतिरिक्त पाठों का समावेश।
  • दर्शनशास्त्र एंव तर्कशास्त्र का ज्ञान निचले स्तर से देना।
  • अन्तर्राष्ट्रीय भाषा का ज्ञान।
  • एक से अधिक देशी भाषाओं का ज्ञान।
  • संस्कृत भाषा का ज्ञान।
  • गृहकार्य की मात्रा और स्तर छात्र की क्षमता के अनुरूप हो।

(b) गुणात्मक समृद्धीकरण- इसका अभिप्राय हैं- पाठ्यक्रम प्रतिभा सम्पन्न बालकों की क्षमता और आवश्यकता के अनुरूप हो, पाठ्यक्रम का स्तर उच्चकोटि का हो, पाठ्यक्रम में आवश्यकतानुसार परिवर्तन सम्भव हो एवं अन्य क्रियाकलाप रचनात्मक एवं स्तरीय हो। इस हेतु निम्नांकित प्रयास करना चाहिए-

  • विचार उत्प्रेरण प्रश्न पूछना।
  • समस्या समाधान के अवसर देना।
  • उच्च एवं कठिन स्तर का गृहकार्य देना।
  • अपेक्षाकृत उच्च पाठ्यक्रमों का निर्धारण करना।
  • पाठ्य सहमागी क्रियाओं में उन्हें जटिल उत्तरदायित्व सौंपना।

किर्क ने प्रतिभा सम्पन्न बालकों की समस्याओं का समाधान करने के तीन सुझाव दिये हैं-

  1. उनके लिए विशिष्ट कक्षा की व्यवस्था करना।
  2. उनकी विशेष प्रगति के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना।
  3. नियमित कक्षाओं का सम्पन्नीकरण।

प्रतिभाशाली बच्चों की विशेषताएँ (Characteristics of Gifted Children)

मुख्यतः प्रतिभा सम्पन्न बालक अपने गुण, व्यवहार एवं सूझ में सामान्य बालकों से भिन्न दिखायी पड़ते हैं। प्रौढ़ों के मध्य अपनी राय देना, अपने वयवर्ग का नेतृत्व करना, प्रत्येक कार्य को सुनियोजित ढंग से करना, स्वंय का मूल्यांकन करना, भावावेश में निर्णय न देना इनकी

विशेषता होती है। ऐसे बच्चों का सामाजिक समायोजन अच्छा होता है।

टरमन और उनके सहयोगियों ने मिलकर (सन् 1920 से 1956 तक) 1528 प्रतिभाशाली बच्चों का एक गहन कालानुडक्रमिक Longitudinal अध्ययन कर आपने अन्य प्राणियों के आधार पर ऐसे बालकों में कई विशेषताएँ बतायी हैं- ये बालक शारीरिक लम्बाई, शारीरिक संगठन, संरचना व स्वास्थ्य में सामान्य बालकों से अच्छे होते हैं। ऐसे बच्चे शीघ्र चलना-बोलना, प्रश्न पूछना और शब्दों एवं विचारों का प्रयोग करना सीख जाते हैं, प्रतिभाशाली बच्चे अधिकतर उच्च सामाजिक- आर्थिक स्तर वाले परिवारों से होते है।

(I) बौद्धिक विशेषताएँ (Intellectual Characteristics)-

  1. सीखने एवं समझने की असाधारण गति।
  2. सामान्य व्यावहारिक ज्ञान उच्चस्तरीतय।
  3. ऐसे बच्चे तार्किक एवं सम्बन्धों को सरलता से समझ लेते हैं।
  4. स्मरण विश्लेषण एवं संश्लेषण करने की विशेष योग्यता।
  5. विस्तृत सामान्य ज्ञान।
  6. अच्छा शब्द भण्डार वाक् पटुता।
  7. कक्षा में प्रश्न पूछते रहते हैं।
  8. अच्छे एवं असामान्य व्यवहार, विचार व्यक्त करने वाले। कक्षा में सामान्य छात्रों से आगे रहते हैं।
  9. सदैव सतर्क, गहरी अरुचि, अवलोकनशील एवं प्रति उत्तर देने वाला।
  10. अवसाध केन्द्रित करने की व्यापक क्षमता।
  11. मौलिक चिन्तन एवं नवीनता के प्रति जिज्ञासु।
  12. सामान्य विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों में दक्ष।
  13. उच्च बुद्धि लब्धि 120 या अधिक।

टरमन, विटी, मार्टिन्सन, गिलफोर्ड एवं मारे तथा गैलेघर के अध्ययनों के आधार पर उपर्युक्त विशेषताओं का चयन किया गया।

(II) शारीरिक विशेषताएँ (Physical Characteristics)-

  1. प्रतिभा सम्पन्न बच्चों का शारीरिक विकास सामान्य बच्चों से तीव्र होता है।
  2. सामान्य बच्चों की तुलना में अच्छी शारीरिक संरचना एवं स्वास्थ्य।
  3. इनका वजन, लम्बाई, सामान्य अच्छी शारीरिक संरचना एवं स्वास्थ्य।
  4. शीघ्र विकास करते हैं और तुरन्त प्रतिकार करते हैं।
  5. चलन व बोलना शीघ्रातिशीघ्र सीखते हैं।
  6. इनकी अभिरुचियाँ विचित्र होती है।
  7. ज्ञानेन्द्रिय विकास उत्तम व शीघ्र होता है।
  8. विद्यालय में शीघ्र प्रवेश लेते हैं।
  9. इनको किशोरावस्था के लक्षण शीघ्र उत्पन्न हो जाते हैं।
  10. विटी 1930 के अनुसार- इनमें शारीरिक विकृतियाँ कम पायी जाती हैं। ये अच्छे खिलाड़ी होते हैं तथा अधिक चैतन्य एवं क्रियाशील होते हैं।

(III) मानसिक विशेषताएँ (Mental Characteristics)-

  1. ऐसे बच्चों में बोलने की क्षमता अच्छी होती है और विचार उच्च होते हैं।
  2. उनमें अपनी वास्तविकता होती है (They Possess originality) और विचार अस्वाभाविक होते हैं।
  3. विचार प्रक्रिया में लोच होती है और नूतन रास्तों को खोजने में अग्रणी होते हैं।
  4. मस्तिष्क अन्वेषणशील होता है, अन्वेषण करते हैं और नये तथ्य प्रस्तुत करते हैं।
  5. अन्वेषणात्मक विचार सदैव रचनात्मक होते हैं।
  6. शैक्षिक दृष्टि से कक्षा में सदैव आगे रहते हैं और अधिगम क्षमता तीव्र रहती है।

(IV) व्यक्तित्व सम्बन्धी विशेषताएँ (Personality Characteristics)-

ऐसे बच्चों का व्यक्तित्व अच्छा होता है। व्यक्तित्व एवं प्रतिभा सम्पन्न में सकारात्मक सम्बन्ध होता है। ऐसे बच्चों को सभी चाहते हैं एवं सभी पहचानते हैं। ये उच्च महत्वाकांक्षी एवं परिश्रमी होते हैं। इनमें उच्चकोटि की रचनात्मकता होती है। इनमें चिन्ता और मानसिक विषाद कम देखा जाता है। यह स्वंय से सीखने को तत्पर रहते हैं। प्रेरणाशक्ति सामान्य बच्चों से अधिक होती है और सौन्दर्यानुभूति उच्च स्तर की होती है। इनमें व्यक्तित्व सम्बन्धी कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  1. आज्ञाकारी होते हैं।
  2. साहसी होते हैं।
  3. इनमें आगे बढ़ने की इच्छा प्रबल होती हैं।
  4. वह परिश्रमी, संवेदनशील और दृढ़ प्रतिज्ञ होते हैं।
  5. अपनी भूल को तुरन्त स्वीकार करते हैं और जिज्ञासु होते हैं।
  6. एकान्त में रहना पसन्द करते हैं।
  7. ऐसे बालक अन्तःप्रज्ञात्मक (Intuitive), उत्पादनशील (Productive) और एकांतप्रिय (Reserve Nature) होते हैं।
  8. सदैव सतर्क, कर्मनिष्ठ, शक्तिशाली एवं साहसी होते हैं।
  9. समाज में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करते हैं।
  10. पुनः स्मरण की क्षमता अधिक होती है।
  11. स्वभाव से मनोविनोदी होते हैं।
  12. रचनात्मक स्वभाव वाले होते हैं।
  13. इनमें जागरूकता का विशेष गुण होता है।

(V) सामाजिक विशेषताएँ (Social Characteristics)-

प्रतिभा सम्पन्न बच्चों में सामाजिक समायोजन उच्चस्तरीय होता है। ‘टरमन’ ने 1925 में 500 बच्चे और 1930 में /विटी/ ने 100 प्रतिभा सम्पन्न बालकों का अध्ययन किया और देखा कि बौद्धिक क्षमता वाले और सामाजिक समायोजन में धनात्मक सम्बन्ध होता है। इस आधार पर इनमें अनेक विशेषताएं पायी जाती हैं-

  1. नेतृत्व करने की योग्यता।
  2. ऐसे बच्चे अपने समूह में लोकप्रिय रहते
  3. अपनी आयु से उच्च आयु वाले बच्चों के साथ खेलमा और बातें करना पसन्द करते हैं, किसी भी कार्यक्रम में आगे बढ़कर भाग लेते हैं।
  4. इनमें सौजन्यता, सहयोग, आज्ञाकारिता एवं अनुशासनप्रियता का गुण होता है।

(VI) नकारात्मक विशेषताएं (Negative Characteristics)-

प्रतिभा सम्पन्न बच्चों में कुछ नकारात्मक लक्षण देखने को मिलते हैं, जो निम्नलिखित हैं-

  1. ईर्ष्यालु एवं अहंकारपूर्ण व्यवहार।
  2. लापरवाह एवं दोषपूर्ण वर्तनी।
  3. अपनी रुचि के कार्यों के आगे, कक्षा कार्य की उपेक्षा।
  4. शिक्षक के आदेश की उपेक्षा।
  5. हठवादी।
  6. कभी-कभी एकान्त में रहने की इच्छा।
  7. कुछ अवसरों पर अधिक वाचाल हो जाते हैं।
  8. कुछ अवसरों पर अधिक असहाय अनुभव करते हैं।

किर्क महोदय ने एक स्कालर के रूप में प्रतिभासम्पन्न बच्चों की निम्नांकित विशेषताएं बतायी हैं-

  1. साहित्य तथा प्राचीन इतिहास पढ़ने एवं वाद-विवाद करने में विशेष रुचि।
  2. परम्परागत विषयों को पढ़ने और हस्त कार्यों को सीखने में कम रुचि।
  3. यह अपनी रुचियों में सामाजिक नहीं दिखायी देते।
  4. सामान्य बच्चों की अपेक्षा इनमें सामाजिकता कम होती है।

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