1987-89 ई. में अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों का नया देतांत

अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों का नया देतांत (तनाव शैथिल्य)

अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में नए शीत युद्ध के प्रादुर्भाव के 7 वर्षों के अन्दर-अन्दर, दोनों महाशक्तियों, उनके गुट के कर्ता तथा शेष तथा राष्ट्रों ने यह महसूस करना शुरू कर दिया कि इससे पहले कि यह वापस न पलट सकने को स्थिति में पहुँचे, इस पर नियन्त्रण करने की आवश्यकता है। राष्ट्रों के शांति आन्दोलन के रूप में निःशस्त्रीकरण तथा शस्त्र-नियन्त्रण के पक्ष में प्रभावशाली विश्व जनमत का उदय, निर्गुट राष्ट्रों द्वारा दोनों उच्च शक्तियों को शस्त्र दौड़ को समाप्त न करने की नहीं तो कम से कम इस पर नियन्त्रण करने की आवश्यकता को महसूस करवाने के प्रयल, छः राष्ट्रों के द्वारा निःशस्त्रीकरण उपक्रम द्वारा किया गया अच्छा कार्य, राजीव गांधी तथा मिखाईल गोर्बाच्योव द्वारा संयुक्त रूप से घोषित नई दिल्ली घोषणा-पत्र में घोषित उद्देश्य, यूरोप द्वारा शस्त्र-नियन्त्रण एवं निःशस्त्रीकरण के सोवियत संघ के प्रस्ताव को स्वीकार करने तथा उस जैसा ही कोई प्रस्ताव रखने के लिए नाटो (NATO) द्वारा अमरीका पर डाला गया आन्तरिक दबाव तथा विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों तथा युद्धों को बुद्धिमता तथा बातचीत द्वारा समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव द्वारा किए गए प्रयत्न, इन सभी ने मिलकर 1980 के उत्तरार्द्ध में अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण में काफी सुधार किया तथा अपनी उत्पत्ति के सात वर्षों के बाद ही नया शीत युद्ध कम होना शुरू हो गया तथा विश्व ने युद्ध की व्यर्थता तथा खतरों को पूर्णतया अनुभव कर लिया। दोनों ही महाशक्तियों ने नए शीत युद्ध के युग से बाहर आने या इसका क्षेत्र सीमित करने का एक बार फिर निर्णय कर लिया।

सोवियत नेता मिसाईल गोर्बाच्योव द्वारा निर्भीक उपक्रमों के रूप में नये दीतां को शुभारम्भ हुआ। परैसट्रोइका तथा ग्लॉसनास्ट की भावना के अन्दर कार्य करते हुए विश्व जनमत की चीखों को तथा तीसरे विश्व के राष्ट्रों की तथा निर्गुट राष्ट्रों की मांग को सम्मान प्रदान करते सोवियत नेता निःशस्त्रीकरण एवं शस्त्र-नियन्त्रण की दिशा में कुछ प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए आगे आए। अमरीका तथा इसकी स्वैच्छिक स्वीकृति ने मार्ग को और भी सुलभ बना दिया और अमरीका तथा सोवियत संघ द्वारा ऐतिहासिक INF संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसके अनुसार दोनों ही राष्ट्र एक दूसरे के निरीक्षण के अन्तर्गत यूरोप में लगी अपने मध्यम दूरी की मिसाइलों को नष्ट करने के लिए मान गए। यह ऐतिहासिक समझौता तथा जिस गति के साथ इसको लागू किया गया, उसने समकालीन अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में सकारात्मक एवं गुणात्मक परिवर्तन कर दिया। ये सभी सोवियत परिवर्तन अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में सकारात्मक एवं गुणात्मक परिवर्तन कर दिया। ये सभी सोवियत परिवर्तन अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में घटित हुई एक घटनाओं में प्रतिबन्धित हुए। इरान-ईराक युद्ध की समाप्ति, सोवियत सेनाओं का अफगानिस्तान से हटना, नामीबिया की आजादी के सम्बन्ध में चार-देशीय समझौता, सोवियत संघ द्वारा घोषित शस्त्रों में कटौती, NATO शक्तियों में अमरीका द्वारा स्वीकृत शस्त्रों में कटौती, सोवियत संघ-चीन का पुनर्मिलन, कम्पूचिया से वियतनामी सेनाओं की वापसी, उत्तरी कोरिया तथा दक्षिणी कोरिया के पुनर्मिलन का प्रयल, फिलिस्तीन द्वारा इस्राइल को मान्यता तथा अमरीका-फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के बीच सीधी बातचीत, विभाजित साइप्रस के यूनानी तथा तुर्क समुदायों के बीच सीधी वार्ता, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में संकट के समय स्थिति को सम्भालने में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका में राष्ट्रों का पुनः स्थापित होता विश्वास, नई दिल्ली घोषणा आदि इन सभी घटनाओं से पता चला कि अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में एक नए दीतां का प्रादुर्भाव हो चुका था। नया दीतां काफी गति से विश्व स्तर पर छा गया तथा इसने शीत युद्ध की समाप्ति को सम्भव बना दिया।

1985-87 ई. के समय से नया शीत युद्ध कमजोर होना आरम्भ हो गया। INF सन्धि के बाद अमरीका और सोवियत संघ ने आपसी विश्वास तथा सहयोग बढ़ाने वाले कई उपायों पर चलना आरम्भ कर दिया। शस्त्र नियंत्रण की ओर प्रगति की गई। अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंधों के विभिन्न मुद्दों पर एक मत बनाये जाने का प्रयास किया गया। ईराक के विरुद्ध खाड़ी युद्ध में दोनों महाशक्तियों ने आपस में सहयोग किया। यूरोपीय देशों में आपसी सहयोग का एक नया युग आरम्भ किया गया । पूर्वी यूरोपीय देशों में समाजवादी व्यवस्थाओं की समाप्ति के बाद उदारवादी-लोकतंत्रीय व्यवस्थाओं के आगमन ने यूरोपीय देशों में सहयोग की प्रक्रिया को बल दिया । जर्मनी एक देश बन गया तथा यूरोप का ध्यान अब राजनीतिक एकीकरण की ओर लग गया। फिर 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया। इससे शीत युद्ध पूर्णरूप से समाप्त हो गया। नये दीतां ने शीत युद्ध को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया।

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