अंग्रेज एवं सिराजुद्दौला के बीच मतभेद के कारण

अंग्रेज एवं सिराजुद्दौला के बीच मतभेद के कारण

नवाब का शासन भारत के उस समय के अन्य शासकों के शासन से भिन्न था और न उसके अत्याचार ही अंग्रेजों द्वारा उसके विरोध का कारण थे। झगड़े के मुख्य कारण कुछ अन्य थे जो निम्नलिखित हैं :

  1. राजनीतिक

    झगड़े का मुख्य कारण सिराजुद्दौला का अपनी शक्ति का व्यावहारिक प्रयोग था। जिस समय वह गद्दी पर बैठा था तभी अलीवर्दीखाँ की बड़ी बेटी घसीटी बेगम सिराजुद्दौला के छोटे भाई और अपने गोद लिये हुए लड़के मुराउद्दौला को नवाब बनाने के पक्ष में थी। पूर्णिया का सूबेदार शौकतजंग जो नवाब का सम्बन्धी भी था, गद्दी का दूसरा दावेदार था जिसे अक्टूबर 1756ई0 में नवाब ने एक युद्ध में परास्त किया और मार दिया। नवाब का सेनापति तथा अलीवर्दीखाँ का बहनोई मीरजाफर भी यदि नवाब बनने का नहीं तो नवाब के नाम से स्वयं राज्य चलाने के लिए अवश्य उत्सुक था। कुछ ऐसी घटनाएं हुई जिनसे सिराजुद्दौला ने यह अनुभव किया कि अंग्रेज न केवल उसकी आज्ञा को ही मानने से इन्कार करते हैं बल्कि उसके शत्रुओं तथा गद्दी के दावेदारों की सहायता भी करते हैं। इस कारण नवाब होने के नाते उसने अंग्रेजों की शक्ति को दुर्बल करने का प्रयत्न किया।

  2. सिराजुद्दौला का प्रारम्भ से ही अंग्रेजों पर सन्देह करना

    कुछ अंग्रेज इतिहासकारों के अनुसार सिराजुद्दौला प्रारम्भ से ही अंग्रेजों पर सन्देह करता थ। नवाब अलीवर्दीखों दक्षिण में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों की प्रगति के कारण उनके प्रति शंकालु हो गया था। उसका विचार था कि यूरोपियन बंगाल में वही कार्य करेंगे जो वह दक्षिण में कर रहे थे। हॉलवेल ने लिखा है कि अलीवर्दीखाँ ने सिराजुद्दौला से मरते समय कहा था कि “देश में यूरोपियनों की शक्ति क्या है, इसका ध्यान रखो। तेलंगाना की भूमि में उनकी राजनीति और युद्धों को देखते हुए तुम्हें जागृत रहना चाहिए। अपने पारस्परिक झगड़े के आधार पर उन्होंने राजा की भूमि और उसकी प्रजा की सम्पत्ति को आपस में बाँट लिया है। तीनों को एक साथ दुर्बल करने की मत सोचना। अंग्रेजों की शक्ति अधिक है पहले उसे समाप्त करना। तब अन्य तुम्हें कम दुःख देंगे। जब तुम उनकी शक्ति को दबा दो, तो मेरे बच्चे, उन्हें सैनिक रखने और किले बनाने की आज्ञा मत देना। यदि तुमने यह आज्ञा दी तो देश तुम्हारा नहीं रहेगा।’ हॉलवेल का यह कथन चाहे कर विचार मात्र हो, परन्तु इसमें जो शंका व्यक्त की गयी थी, उसमें अवश्य ही बल था। नवाब यदि प्रारम्भ से नहीं तो बाद में अवश्य ही अंग्रेजों के व्यवहार को शंका से देखने लगा था जिसके कारण उसने बंगाल में उनकी शक्ति को तुरन्त दबाने का प्रयत्न किया।

  3. नवाब के प्रति अंग्रेजों का दुर्व्यवहार

    फ्रांसीसियों की भाँति अंग्रेजों ने कभी भी नवाब के प्रति सम्मान प्रदर्शित नहीं किया। अंग्रेजों ने नवाब के राज्याभिषेक के अवसर पर भी उसे बहुमूल्य उपहार नहीं दिये। एक बार तो उन्होंने नाबब को अपनी कासिमबाजार की फैक्टरी दिखाने तक से इन्कार कर दिया। मि. लॉ ने लिखाः “उन्होंने अपने व्यापार के सम्बन्ध में भी कभी कोई सूचनात्मक पत्र सिराजुद्दौला को नहीं लिखा।” नवाब को यह विश्वास हो गया था कि अंग्रेज उसके शत्रु शौकतजंग से पत्र-व्यवहार कर रहे थे और इस सब से नवाब के सम्मान को ठेस पहुंची।

  4. व्यापारिक झगड़ा

    अंग्रेज मुगल बादशाह फर्रुखशियर के 1717ई. के आदेश पत्र के अनुसार बिना कर दिये व्यापार करते थे। इससे भारतीय व्यापारियों को हानि होती थी और नवाब की आय में कमी आती थीं इसके अतिक्ति अंग्रेज अपने ‘दस्तक’ (Free Pass) का प्रयोग भारतीयों को करने देते थे जिससे अंग्रेजों के नाम से भारतीय व्यापारी भी अपने व्यापारिक सामान को कर मुक्त करा लिया करते थे। यदि नवाब के अधिकारी इसे रोकना भी चाहते थे तो अंग्रेज ऐसे भारतीय व्यापारियों को संरक्षण प्रदान कर देते थे। नवाब इससे असन्तुष्ट था और इस सम्बन्ध में अंग्रेजों से कोई अन्य समझौता करना चाहता था। परन्तु अंग्रेज अपने इस विशेषाधिकार को छोड़ने के लिये तत्पर न थे। अतएव अंग्रेजों और सिराजुद्दौला के बीच आर्थिक झगड़ा मुख्य था।

  5. अंग्रेजों का कृष्णबल्लभ को नवाब के हाथों में देने से इन्कार करना

    कृष्णबल्लभ घसीटी बेगम के दीवान राजबल्लभ का पुत्र था। राजबल्लभ ने घसीटी बेगम के धन को छिपाने का प्रयत्न किया। इस कारण नवाब ने उसे उसके पद से हटा दिया। परन्तु इससे पहले ही राजबल्लभ ने अपनी सम्पत्ति अपने पुत्र कृष्णबल्लभ को देकर उसे अंग्रेजों के संरक्षण में भेज दिया। जब नवाब ने कृष्णबल्लभ को अंग्रेजों से वापस माँगा तो अंग्रेजों ने ऐसा करने से स्पष्ट इनकार कर दिया तथा नवाब के प्रतिनिधि नारायनसिंह का अपमान भी किया। इससे नवाब यह अनुभव करने लगा कि अंग्रेज उसके शत्रुओं को संरक्षण देते हैं। नवाब का यह विचार ठीक भी था क्योंकि अंग्रेज नवाब के डर से भागे हुए सभी व्यक्तियों को शरण देते थे।

  6. अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता के किले की किलेबन्दी करना और नवाब की आज्ञा का पालन करना-

    इसी अवसर पर अंग्रेजों को फ्रांसीसियों से युद्ध की आशंका हुई। इस कारण उन्होंने कलकत्ता के किले की मरम्मत और उसके चारों तरफ एक खाई खोदनी आरम्भ की। नवाब को यह कार्य पसन्द नहीं आया और उसने किले की मरम्मत को तुरन्त बन्द कर देने और खाई को समतल कर देने का आदेश जारी किये। उसने अंग्रेजों को लिखा: “तुम व्यापारी हो, तुम्हें किले की क्या आवश्यकता है। मेरी सुरक्षा में रहते हुए तुम्हें किसी भी शत्रु का भय नहीं होना चाहिए।” यह कहा गया है कि किसी दम्भी अंग्रेज अधिकारी ने नवाब के कर्मचारियों से यहाँ तक कहा “यह खाई भर दी जायेगी परन्तु मुसलमानों के सिरों से” यह सूचना नवाब को दी गयी और नवाब ने अंग्रेजों को सजा देने का निश्चय कर लिया।

इस प्रकार सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच झगड़ा आरम्भ होने के कारण बन गये। स्वयं मि० हिल ने स्वीकार कियाः “इस प्रकार स्पष्ट है कि सिराजुद्दौला ने जिन बहानों के आधार पर अंग्रेजों पर आक्रमण किया, उनमें तर्क अवश्य था।

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